Ready to Success सफलता की तैयारी -2

सीधे तौर पर सफलता का कोई माप दण्ड नहीं होता, सफलता एक कार्मिक समूह का नतीजा है सफलता एक भावनात्मक प्रक्रिया है जो किसी व्यक्ति द्वारा किये जाने पर उस व्यक्ति की मनोकामना को पूर्ण कर देता है जैसा की मैंने अपने पिछले ब्लॉग में कहा है की सफलता के प्रति आपका मानसिक और शारीरिक योग ही आपकी सफलता का मूल कारण हैphoto-1466193341027-56e68017ee2d

इसके बिना आप असफल बने रहते है इतना होने पर बाकी चीजों की व्यवस्था स्वमेव होने लगती है किसी एक दिशा में किया जाने वाला सम्पूर्ण प्रयास ही सफलता का स्वरुप है ! इस सृष्टि को देखिये सृष्टि की व्यवस्था को देखिये बहुत ध्यान से देखिए कितनी सुन्दर व्यवस्था है ना , ये सृष्टि एक उच्च मानसिक क्रिया का परिणाम है ये पूरी सृष्टि मनोमय सहित है हर तरफ मन ही मन है शरीर चला जाता है किन्तु मन और मन के कार्य रह जाते है !

सोलर सिस्टम को देखिये सूर्य चन्द्रमा उल्का तारे अनेक उपग्रह अनेक रसायन गैसे आदि असीम मन की जादुई  ऊर्जा से उत्पन्न है आप भी एक असीम मन ही है किन्तु आपको इसपर विस्वाश नहीं होता आपका मन आपके लिए उतना ही कार्य करता है जितना आप इसे जानते है यदि आपके मन में व्यापकता नहीं है तो आप लगातार बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकते ये समस्त जगत और समस्त सृष्टि के शून्य से हजार गुना अधिक सक्तिसाली मनुष्य का अवचेतन मन होता हैholiday-1569608__480

क्योकि शरीर से परे यही जगत का मूल आधार है सभी मनुस्यो का मन एक मन है सिर्फ मनुष्य के कर्म और सँस्कार अलग अलग होते है और किसी में कोई फर्क नहीं है सब एक में ही समाहित है किन्तु अलग अलग कार्मिक यात्रा  पर है पृथ्वी जगत पर सभी सामाजिक सिस्टम मनुस्यो के लिए मनुष्य द्वारा ही बनाये गए है ! जो सफल अथवा असफल है सभी एक नए जीवन की तैयारी में है उनकी गति उसी ओर है ………..परन्तु

तथ्य यह है की आपको सफलता से ही योग करना चाहिए क्योकि ये सृष्टि सफलता का ही परिणाम है आपका जन्म आपका शरीर आपका घर आपकी गाडी आपका धन सब कुछ सफलता का ही परिणाम है इस सृष्टि में आप सफलता के ही केंद्र बिंदु है ! असफलता के नहीं क्योकि सृष्टि और आपका जन्म पहले से ही सफलता का एक भव्य  रूप है जब सृष्टि की रचना हुई तो कई लाख वर्ष बाद मनुष्य शरीर की रचना हुईhouse-money-capitalism-fortune-12619

क्योकि मनुष्य के लिए मनुष्य के आगमन से पहले बहुत सी चीजों की उत्पत्ति होनी  बहुत जरुरी थी इस कार्य के दौरान असीम मन ने भी धैर्य रखा हुआ  था क्योकि वह जानता है की देर कभी नहीं होती सिर्फ चीजों को व्यवस्थित होना होता है प्रत्येक मनुष्य स्वयं सृष्टि करता है वह दो प्रकार के संसार की रचना करता है सकारात्मक अथवा नकारात्मक ! मन ही कर्ता मन ही भोक्ता ! मन ही सृष्टि और शरीर का कारण है जिस मन के भीतर सफलता का दीप प्रज्वलित हो जाये वह मन अनेक विशाल सफलताओ को जन्म देता है विस्वाश के आभाव में सभी कार्य अर्थहीन और निस्तेज हो जाते है

इसलिए वहां असफलता का स्थाई जन्म बना ही रहता है आप किसी शक्ति में विस्वाश न रखना चाहे आपकी इच्छा लेकिन स्वयं में एक सकारात्मक विस्वाश तो रख ही सकते है ध्यान रहे आपका विस्वाश ही आपको बनाता है जैसा आपका विस्वाश वैसा आपका जीवन सृष्टि में सभी जीवो के लिए सब कुछ व्यवस्था है जब आप किसी चीज की कामना करते है तो मन में करते है फिर आप श्रम करते है इन्तजार करते है यदि इस क्रम में आपके भीतर सफलता का विस्वाश नहीं है तो सौ प्रतिसत आप की मनोकामना अपूर्ण ही रहेगी आप चाहे जो कर ले सफलता प्राप्त नहीं होगी !

असीम मन को विस्वाश था की वह सृष्टि और शरीर की रचना कर सकता है इसलिए वह सृष्टि करता के रूप में सफल हुआ ! विस्वाश भावनात्मक होना चाहिए ! फालतू का विस्वाश निरर्थक विश्वाश होता है ये निराशा ही प्रदान करता है इसको अहंकार भी कह सकते है जो की नकारात्मक भाव है विस्वाश का सही अर्थ है होना, यानि किसी चीज का न होते हुए भी होना !

pexels-photo-1737405 आपका उद्देश्य कुछ भी हो आपकी मंजिल कही भी हो आपको कुछ भी पाना हो सर्वप्रथम उसके प्रति आपके भीतर शुद्ध भावनात्मक प्रेम होना चाहिए इससे उसे पाने का आपका विश्वाश और भी अधिक मजबूत हो जाता  है फलस्वरूप कुछ समय प्रयास के बाद आप उसे प्राप्त कर लेते है बार बार असफलता का मूल कारण आपके भीतर ही होता है बाहर नहीं ! इस सृष्टि में सभी चित्र सफलता के ही चित्र है यदि आप चाहे तो आप असफल नहीं हो सकते क्योकि सृष्टि की वह अद्भुत चेतना आपके भीतर ही मौजूद है जो  अपने किसी भी प्रकार के कार्य में कभी बार बार  असफल नहीं होती !

 

 

 

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s