Success Psychology सफलता का मनोविज्ञान !

एक वक़त वह भी था जब मैं बहुत निगेटिव व्यक्ति हुआ करता था और सफलता के लिए कठिन श्रम करता था लेकिन संतुस्टी लायक सफलता मुझे नहीं मिल रही थी! मेरे दिमाग में सफलता के सपने तो रहते थे किन्तु मन की नकारात्मक
ऊर्जा मेरे सभी प्रयासों पर पत्थर बरसा देती थीै मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था की ऐसा क्यों हो रहा है मैं किसी ईश्वर में विस्वाश नहीं करता था और मनुष्य जीवन को घास फूस की तरह समझता था
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जब आप किसी सफलता के लिए दिन रात प्रयास करते है किन्तु मानसिक तनावों अथवा आशंका के साथ तो मंजिल करीब होते हुए भी प्राप्त नहीं होती मैं एक स्थाई बड़ी जॉब की तलाश में था यह वर्ष 1994/2005 तक की बात है योग्यता होते हुए भी निराशा जनक परिणाम थे किन्तु किसी घटना के कारण मैं पॉज़िटिव इंसान होने लगा था यह वर्ष 2005 की बात है मुझे अपनी बेस्ट स्थाई जॉब मिल गयी
सफलता मनुष्य के पास ही होती है लेकिन वह दिखाई नहीं देती तब तक जब तक इंसान उसे सकारात्मक नजरिये से नहीं ढूढता वर्ष 2016 से मैंने योग सीखा और धीरे धीरे सांसारिक कर्मो के साथ मैं योग कर्म में अधिक लीन होता चला गया
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इंसान का ब्रेन लगभग तीन अरब कोशिकाओं का एक समूह है सारी कोशिकाए इतनी जतन से रखी हुयी है जैसे किसी ने उन्हें बेहतरीन तरीके से बना कर रखा हो ब्रेन तो दिखाई देता है किन्तु मन उस सॉ्टवेयर की तरह है जो मौजूद तो रहता है लेकिन दिखाई नहीं देता मन जो महसूस होता है वह एक चेतन मन है जो होते हुए भी महसूस नहीं होता वो अवचेतन मन कहलाता है दोनों एक ही है किन्तु दोनों का कार्य अलग अलग होता है

मुझे याद है जब मैंने अपने घर के एक कमरे में लगी एक देवता की फोटो को फाड़ कर घर से बाहर फेंक दिया था प्रत्येक विचार एक तरंग उत्सर्जित करते है विचार ही भावना का रूप ले लेते है जब मनुष्य का कोई एक विचार उसके मन में घर करके बैठ जाता है तो वह अवचेतन हो जाता है वह अपनी प्रकृति के अनुसार बाहरी दुनिया में प्रकट होता है एक सफल व्यक्ति प्रत्येक चीजों से समझौता कर लेता है किन्तु अपनी सफलता के लिए अपना रास्ता नहीं बदलता उसकी मानसिकता मात्र सफलता की मानसिकता होती है
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जो ब्रेन लगातार सफलता के दृश्य सफलता की भावना पर ही केंद्रित हो वो ब्रेन सामान्य मानसिक अवस्था से ऊपर उठा हुआ ब्रेन होता है वह अपनी ऊर्जा को प्रत्येक प्रकार की निगेटिव चीजों से दूर रखता है वह अत्यंत कठोर मानसिक व्यक्ति की तरह भी दिखाई देता है उसकी अपनी मंजिल के प्रति जो सकारात्मक भावना होती है वह किसी अन्य चीजों के या कार्यो के प्रति नहीं होती वह अनेक चीजों अनेक मनुस्यो से तब तक दुरी बना कर रखता है जब तक उसे अपनी मंजिल नहीं मिल जाती और नकारात्मक लोग इसे उसका अहंकार समझते है
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सफल व्यक्ति के लिए उसकी सफलता ही सब कुछ है ब्रेन के भीतर ठहरा हुआ एक विचार सफलता का एक पूरा संसार होता है वह विचार उन तरंगो को उत्सर्जित करता है जो समान चीजों को खींच कर उस व्यक्ति के जीवन में लेकर आती है विचारो की तरंगे मैग्नेटिक होती है जो दिखाई नहीं देती जैसे कोई व्यक्ति चाहता है की अगले एक वर्ष में उसे एक कीमती शानदार घर चाहिए किंतु इसके लिए उसे दो करोड़ रूपये लगेंगे जो अभी उसके पास नहीं है

यदि यह विचार उस ब्रेन में जिद और विस्वाश का रूप धारण कर ले तो वह ब्रेन दो करोड़ रूपये का इंतजाम कैसे हो उस पर अपना कार्य शुरू कर देगा वह एक से एक बढ़कर तरीको को ढूंढ कर सामने लाता रहेगा क्योकि ब्रेन को अपना कार्य मिल चूका है एक सही दिशा उसे प्राप्त हो गयी है ब्रेन कई तरीको से कार्य करेगा ब्रेन तब तक चुप नहीं बैठेगा जब तक उसे रोका ना जाये
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प्रत्येक विचारो की एक फ़्रीक़वेंसी होती है जैसे टीवी चैनल्स की अलग अलग फ़्रीक़वेंसीज और तरंगे होती है चैनल बदलते ही फ़्रीक़वेंसीज भी बदल जाती है ठीक इसी प्रकार असफलता की भावना लो फ्रीकवेंसी पर होती है और वह अपनी ऊर्जा के समान ही घटनाओ जो आकर्षित करती है जिससे विपरीत प्रस्थितियो का जन्म होता रहता है और बाहरी दुनिया में असफलता के दृश्य उत्पन्न हो जाते है
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एक विचार अपने जैसे अनंत विचारो का उत्सर्जन करता है सफलता कठोर सकारात्मक नजरिये से ही आती है मानसिक नकारात्मकता को दूर करने का एक ही उपाय है ध्यान योग अपने कार्य के प्रति अपनी सफलता से योग करना सकारात्मक नजरिया है योग का अर्थ जोड़ना है अपने मन को सिर्फ और सिर्फ सफलता की भावना सफलता के दृश्यों से ही जोड़ कर रखना भी योगिक क्रिया है

सकारात्मक ब्रेन को किसी मौसम किसी भी वक़्त से कही
कोई एलर्जी या कोई बाधा नहीं रहती वो बस सारात्मक कार्यो में ही लीन रहता है ऐसा व्यक्ति समाज से अलग थलग नज़र आ सकता है क्योकि वह किसी रास्ते पर चल पड़ा है जहाँ उसे नकारात्मक व्यक्तियों से किसी प्रकार का कोई सरोकार नहीं रहता
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सफल व्यक्तियों के पास कुछ अलग जानकारी होती है चाहे वह आध्यात्मिक हो या स्वयं पर गहरा विश्वास हो जो उन्हें अलग बनाता है इस ब्रम्हांड में सभी भौतिक बस्तुए ऊर्जा से निर्मित है प्रत्येक वस्तु एक पर्टिकुलर फ्रीकवेंसी पर बायब्रेट करते रहते है मनुष्य मन की ऊर्जा अपने जैसे अनेक ऊर्जा वाली चीजों को केंद्रित करता है

सामान्य व्यक्ति और सफल व्यक्ति की विचार धारा भिन्न होती है इसलिए उनका जीवन भी अलग अलग नज़र आता है सारा खेल मनुष्य के भीतर ही छुपा है बहरी दुनिया उसकी छाया मात्र है मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति कभी भी बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकता ! जबकि कठोर ब्रेन वाले व्यक्ति के लिए सफलता एक खेल के सामान होती है क्योकि मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति सफलता से समझौता कर लेता है वह संघर्ष नहीं कर पाता
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सफलता के लिए अपनी मानसिक अवस्था को सुदृढय रखना बहुत जरुरी है चाहे आप आध्यात्मिक बने या ना बने क्योकि अवचेतन मन तो सभी भावनाओं को साकार करता है इस संसार में प्रत्येक मनुष्य योगी है फर्क सिर्फ इतना है की एक सफल व्यक्ति अपनी सफलता से ही योग लगाता है जबकि दूसरा व्यक्ति अनेक मानसिक विकारो से योग बनाये रखता है

4 thoughts on “Success Psychology सफलता का मनोविज्ञान !”

  1. सफलता और योग के संदर्भ में बहुत सुंदर और सटीक अंतिम पंक्ति;
    “एक सफल व्यक्ति अपनी सफलता से ही योग लगाता है जबकि दूसरा व्यक्ति अनेक मानसिक विकारो से योग बनाये रखता है “🙏

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