Success And Maditition Yoga सफलता और ध्यान – योग !

images (60)यदि आप अधिक श्रम करके भी निराश हो रहे है, बार बार असफलता ही प्राप्त हो रही है, कोई विशेष मनोकामना अधूरी ही रह जाती है! तो उसका एक ही अर्थ है आपका फोकस यानी ध्यान अपूर्ण है ! मनुष्य जीवन में सफलता के लिए Focus अति महत्वपूर्ण बिंदु है इसके बिना मनोवांछित सफलता प्राप्त करना कठिन ही नहीं असंभव भी है!
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किसी कार्य में सफलता के लिए ध्यान या फोकस दो प्रकार से किया जाता है एक तो व्यक्ति चलते फिरते किसी चीज पर अपना फोकस या ध्यान लगाए रखता है
दूसरा तरीका यह है की आप प्रति दिन समय निकाल कर अर्ली मॉर्निंग ध्यान में बैठते है और अपने जीवन के सपनो को साकार करने का प्रयास करते है पहला तरीका थोड़ा रिस्की है कोई व्यक्ति किसी विषय में बड़ी तल्लीनता से मगन सड़क पे किसी वाहन से अथवा पैदल जा रहा है तो उसे तमाम एक्सीडेंट होने के खतरे भी होते है
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दूसरा तरीका सर्वोत्तम तरीका होता है सुबह के ध्यान या फोकस से शारीरिक और मानसिक टेंसन और तनाव दूर हो जाता है शरीर को भरपूर मात्रा में कॉस्मिक एनर्जी प्राप्त हो जाती है व्यक्ति का फोकस दिन भर स्थिर और व्यक्ति चैतन्यवान बना रहता है! सारा दिन वह व्यक्ति अत्यंत प्रसन्न और हॅसमुख रहता है वह सृस्टि से जुड़ने लगता है उसके भीतर की दैवीय शक्तिया जागृत होने लगती है भाग्य के सभी बंद रास्ते खुलने लग जाते है जिससे उसके मन में घूम रही कोई भी इच्छा बड़ी तेजी से पूर्ण होने लगती है!

प्रत्येक मनुष्य के भीतर सात प्रकार की कुण्डलनी होती है जिन्हे सात लोक कहा जाता है जब कोई व्यक्ति ध्यान में जाने लगता है तो उसके भीतर के सभी सात लोक खुलने लग जाते है और ध्यानी व्यक्ति को अपना सच्चा अनंत स्वरुप दिखाई देने लगता है वह समझ जाता है की वह सिर्फ एक इंसान नहीं है बल्कि उसने इंसान के रूप में जन्म लिया है किन्तु ध्यान से बाहर आते ही वह पुनः सामान्य मनुष्य हो जाता है यही रहस्य है जिसे मनुष्य रूप से परे जाकर देखा और समझा जा सकता है
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और इसका सीधा रास्ता ध्यान और योग है ! कोई कोई व्यक्ति अपने भीतर की इस दैवीय शक्ति की जागृत अवस्था के साथ जन्म लेता है ! इसके पीछे कोई ना कोई महत्वपूर्ण कारण होता है,जैसे भगवन श्री राम , प्रभु श्री कृष्ण उनके भीतर की ईस्वरीय शक्ति जन्म के साथ ही जागृत थी! इतिहास गवाह है पूरी दुनिया के अनेक धर्मो में ऐसे अनेक व्यक्तिओ ने अब तक जन्म लिया है जिन्हे ईस्वर या पैगम्बर या ईशा मसीह नाम दिया गया !

वही सर्वोच्च शक्ति सभी अन्य सामान्य मनुस्यो के भीतर भी सुप्त अवथा में बिद्यमान है! जरुरत है तो उस शक्ति को पहचानने की उसे जागृत करने की! कोई मनुष्य कमजोर या लाचार नहीं है! उसकी अज्ञानता उसके बुरे कर्म ही उसे कमजोर और लाचार बना कर रखते है!

ध्यान का सीधा अर्थ है अपने किसी इस्ट को याद करना जबकि ध्यानी व्यक्ति किसी और से नहीं बल्कि स्वयं से ही जुड़ता है स्वयं के भीतर ही जाता है सब कुछ उसके भीतर पहले से ही है! बाहर दिखाई दे रहा सारा ब्रम्हांड सारी सृस्टि उसके भीतर मौजूद होती है किन्तु ध्यान से पहले तक वह अचेतन और एक बिंदु शक्ति में समाहित होती है
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ध्यान में मनुष्य की चेतना जब उस बिंदु तक पहुंच जाती है तो वह बिंदु खुल कर अपने भव्य स्वरुप में आ जाता है एक असीम अवचेतन मन जो सारी सृस्टि का जनक और संयोजक है वह प्रत्येक मनुष्य का अपना अवचेतन मन ही है किन्तु मनुष्य जीवन लेकर वह अनेक कर्मो में लिप्त है क्योकि कर्मशील रहना ही उसका गुण धर्म है वही शून्य है जो सामान्य जीवन में दिखाई नहीं देता लेकिन अभौतिक रूप में सभी जगह बिद्यमान है

इसी लिए जब कोई व्यक्ति अपने अवचेतन मन से किसी कार्य को करता है तो उसे जबतदस्त सफलता प्राप्त होती है अब व्यक्ति इसे चाहे जान बूझ कर करे या अनजाने में करे! बहुत से व्यक्ति अपने जीवन की किसी घटना के कारण इसे अनजाने में ही करते है और सफलता की ऊंचाई पर पहुंच जाते है
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यदि आपको घर अथवा कार अथवा कोई जॉब कोई पद कोई सफलता चाहिए तो उसके साथ पूर्ण मानसिक सम्बन्ध जोड़े यह क्रिया ही योग है अर्थात ध्यान है किसी वस्तु की कल्पना किसी भी चीज की प्राप्ति की कल्पना पुरे विस्वास के साथ करना उसे साकार रूप में महसूस करना और यह मानसिक क्रिया लगातार करते रहना ही अवचेतन मन की शक्ति का प्रयोग करना है यह शुरू होता है चेतन मन से किन्तु लगातार एक ही क्रिया होते रहने से यह असीम शक्ति अवचेतन मन से जुड़ जाता है और परिणाम स्वरुप फलित हो जाता है
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ध्यान के भीतर अपनी मनचाही सफलता से योग लगाना ही ध्यान है योग है और सांसारिक जीवन की सफलता है!

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