घटनाएं कैसे घटित होती है ? (What is Make , A Destination)

मनुष्य￰ हो अन्य जीव जंतु सभी के पास एक मन है और मन के भीतर जीवन की सभी भावनाये चित्र सभी घटनाये रिकार्ड होती चली जाती है
प्रश्न यह है की सभी घटनाएं कैसे और क्यों घटित होती है इस लेख में इस ख़ास टॉपिक को बहुत बारीकी से आज समझते है जिससे हम अपने जीवन में अपनी कामना के अनुसार आगे की सभी घटनाओ को मोड़ सके और अपनी इच्छानुसार अपने जीवन का निर्माण कर सके यहाँ समय का बहुत महत्व है समय की महत्ता तो जीवन के हर आयामो में होती है

इस सृष्टि में प्रत्येक वस्तु और सभी जीव जंतु मनुष्य एक एनर्जी लेवल पर बायब्रेट करते रहते है सभी की अपनी अपनी एक फ्रीकवेंसी होती है मैं यह लेख लिख रहा हूँ मेरी भी अपनी एक एनर्जेटिक फ्रीकवेंसी है मनुष्य की फ्रीकवेंसी उसके मन के विचारो और भावनाओँ के बदलने से बदलती रहती है अवचेतन मन एक सुप्रीम पावर होने के कारण इसकी फ्रीकवेंसी अति तीव्र और मैग्नेटिक होती है

जब कोई मनुष्य किसी चीज के बारे में बहुत गहराई से बार बार सोचने लगता है तथा बार बार उसे ही महसूस करने लगता है तो उसकी ये अवस्था अवचेतन मन की अवस्था हो जाती है उस वक़्त उस व्यक्ति के विचारो भावो और मन के भीतर घूम रहे अनेक दृश्यों की ऊर्जा अत्यंत मैग्नेटिक हो जाती है और वह मैग्नेटिक ऊर्जा अपने समान वस्तु या घटना को उस व्यक्ति के जीवन में खीँच कर ले आती है

सृष्टि के भीतर मौजूद एक एक कण एक एनर्जी लेवल पर होने के कारण वह मैग्नेटिक होते है मन के भीतर का एक एक दृश्य एक एक विचार और सभी भावनाये अति तीव्र ऊर्जावान और मैग्नेटिक होती है ! समस्त ब्रम्हांड उत्पत्ति के समय एक नन्हा सा पिंड था सरसो के एक दाने के बराबर था किन्तु उसमे सारी सृष्टि और जीवन प्राण समाया हुआ था वह पिंड एक असीम अवचेतन मन था जिसने कालांतर में अनेक भौतिक बस्तुओ अनेक जीव जन्तुओं और त्री पुरुष का रूप धारण कर लिया!

उस वक़्त वह पिंड एक शून्य मात्र था! आज के आधुनिक विज्ञानं के अनुसार बिग बैंग के वक़्त समय भी नहीं था कोई गति नहीं थी समस्त ब्रम्हांड मात्र शून्य और एक ज्योति के सामान एक छोटा सा पिंड ही था बिग बैंग के पश्चात ही सभी ग्रहों तारों जीव जन्तुओ की की उत्पत्ति हुई!और जो भी निमाण हुआ बहुत सिस्टमैटिक तरीके से हुआ! जैसे किसी ने जान बूझकर सब कुछ एक प्लान की तरह ये सब किया है एक खेल की तरह जहाँ खेलने के लिए सब कुछ है

और इस खेल का सबसे बड़ा हथियार या टूल मन है और इस मन के भी दो भाग है चेतन मन और अवचेतन मन दोनों एक ही सिक्के के दो पहलु हैं! चुकी जो जिस लेवल का होता है वह उसी लेवल का खेल खेलता है अवचेतन मन या असीम शक्ति ने एक अलौकिक कार्मिक खेल को रचा और वह स्वयं इसे अनेक रूपों में खेल रहा है चुकी वह अजन्मा और अनंत है इसलिए यह जीवन मृत्यु का खेल भी अनंत है

इस सृष्टि में वह अकेला है और नहीं भी जैसे एक व्यक्ति के स्पर्म में अनेक संतानें छुपी होती है ठीक वैसे ही उसके भीतर अनेक ब्रम्हांड अनेक शक्तियाँ छुपी हुई है वह सुप्रीम है वह अपनी कल्पना और भावना के जरिये सृष्टि का निर्माण और विनाश करता है

एक आम के बीज में पूरा आम का बगीचा छुपा होता है मूलतः वह एक ही होता है उस असीम अवचेतन मन को स्त्री भी कह सकते है पुरुष भी कह सकते है या दोनों को एक कह सकते है उसे एक नाम से पुकार सकते है या अनेक नामो से पुकार सकते है वह केवल एक बौद्धिक बहने वाली अनत शक्ति है वह स्वयं अपने भीतर से ही देवताओ और दानवो को उत्पन्न करता है किसी भी शक्ति का मूल कार्य है क्रियाशील रहना ! क्रियाशील ही कर्म है ! इस प्रकार वह असीम शक्ति इस सृष्टि के जरिये हमेशा क्रियाशील और कर्मशील रहता है

जब वह असीम शक्ति मनुष्य और बिभिन्न जीवो के रूप में बिभिन्न सुख और दुखो का अनुभव करते हुए किसी विचार पर गहराई से ध्यान केंद्रित करता है तो उक्त कामना के अनुसार जीवन के परिणाम बदल जाते है किसी भी मनुष्य के अवचेतन मन की बात हो ! वह चाहे किसी मेट्रो सिटी में रहने वाला कोई बहुत पढ़ा लिखा व्यक्ति हो, या वह चाहे किसी घने जंगल में रहने वाला कोई अनपढ़ अज्ञानी आदि वासी मानव हो ! इससे फर्क नहीं पड़ता ! क्योकि दोनों के भीतर एक ही प्राण और एक ही अवचेतन मन है

मन के भीतर प्रत्येक भाव चाहे वह डर हो साहस हो आत्मग्लानि हो क्रोध हो कुछ भी हो वह अपने ही समान घटनाओ को जन्म देता है इसलिए मन को साफ़ दिशा और सकारात्मक दिशा में रखना जरुरी होता है जिसके कारण जीवन में सकरात्मक और मनचाही घटनाये घट सके!

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