अपने भीतर की आत्म ज्योति को प्रज्वलित करो – भाग 8 ( Self Inner Lite The Baurn)

इस सृष्टि में अवचेतन मन के द्वारा रचित दो प्रकार की भावनाएं काम कर रही है जिसे हम अद्वैत के नाम से जानते है मन एक ही है किन्तु भावनाये दो है एक सकारात्मक दूसरा नकारात्मक आप के पास हमेशा दो रास्ते होते है एक किसी चीज को मानना या फिर ना मानना प्रत्येक मनुष्य इसके लिए स्वतंत्र होता है

पेट पालने के लिए प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन में कुछ ना कुछ कर्म करना ही पड़ता है ये सारी सृष्टि कर्म शील है जैसे पृथ्वी का सूर्य के चक्कर लगाना सूर्य का जलना मौसम बदलना आँधी बारिश तूफान बसंत पतझड़ फूलो का खिलना रात्रि और दिन जीवन और मृत्यु ये सब सृष्टि कर्म है इसी तरह मनुष्य का अवचेतन मन भी जीवन और मृत्यु के बाद भी कर्म शील होता है

अवचेतन मन के द्वारा हर कार्य फलित होता है ये ही वो परम शक्ति है जिसके बाद कोई अन्य शक्ति नहीं होती यही वह शून्यमय पारलौकिक शक्ति है जो सृष्टि और प्रत्येक भौतिक अभौतिक घटनाओँ का मूल कारण है मनुष्य जीवन में स्वयं और परिवार का भरण पोषण के लिए सामाजिक सिस्टम के हिसाब से धन की जरुरत होती है समाज और धन का निर्माण भी अवचेतन शक्ति द्वारा रचित है

जिस धन की खोज में हम अनेक कर्म करते है वो धन सिर्फ एक वस्तु मात्र है धन तो अवचेतन मन के भीतर होता है कुछ भी हो स्वास्थ्य धन सुख सफलता दीर्घायु सुंदरता आदि सब कुछ सभी मनुष्य के अपने अवचेतन मन के भीतर समाहित है 90% लोग आज भी अवचेतन मन और उसकी शक्ति के बारे में ठीक से नहीं जानते और यही उनकी सबसे बड़ी अज्ञानता है

अवचेतन मन प्रत्येक भावना को फलित करता है चाहे वो सकारात्मक हो या नकारात्मक उसका काम ही है अपने भीतर की प्रत्येक भावना को साकार कर देना यानि अभौतिक भावना को भौतिक जगत में प्रकट करना!याद रहे की धन की भावना से धन प्राप्त होता है गरीबी की भावना से गरीबी प्राप्त होती है इस बात को मैं अपने पिछले कई ब्लॉग में बार बार लिख चूका हूँ किन्तु यहाँ फिर से लिख रहा हूँ

ये कैसे होता है जब किसी मनुष्य के अवचेतन में धन प्राप्ति की गहरी चाहत यानि प्रबल भावना होती है तो सर्व प्रथम उस व्यक्ति के जीवन में नए नए व्यक्ति आने लगते है जो धन के अनेक आइडियाज लेकर आपसे मिलते है अचानक से आपके अनेक काम बनने लगते है और आपको धन की प्राप्ति होने लगती है

यदि मन के भीतर गरीबी और अनेक समस्याए ही व्याप्त हो तो उसी टाइप के और भी लोग मिलने लगते है और जीवन में दुःख और गरीबी लगी ही रहती है क्योकि जिसके पास जो ज्ञान और जो रास्ता होगा वो आपको वही देगा ईस्वर कभी किसी का बुरा नहीं चाहता उसके लिए प्रत्येक जीव जंतु एक जैसे है वह सभी से एक समान प्रेम करता है क्योकि वह स्वयं ही सभी रूपों को धारण किये है और सृष्टि के प्रत्येक कण कण में व्याप्त है

जो व्यक्ति इन रहस्यों को नहीं जानता या जो जानकर भी नहीं मानता ये सब पिछले सँस्कारो की वजह से होता है नए कर्मो द्वारा पुराने कर्मो को काटा जाता है मनुष्य का प्रत्येक नया कर्म इस प्रकार हो जिससे बीते बुरे कर्मो का असर या तो बहुत कम हो जाये या बिलकुल समाप्त हो जाये

मनुष्य का अपना सारा जीवन उसकी अपनी सोंच का जीवन होता है किसी अन्य को दोष देना व्यर्थ है यदि आपके मन में किसी बात को लेकर हीन भावना है तो यह आपकी सबसे बड़ी गलती है जो आपको कभी कहीं सफल नहीं होने देगी हीन भावना किसी भी बात को लेकर हो हमेशा घातक होती है अपनी भावना को उच्च करे क्योकि इस सृष्टि में ईस्वर की एक भी रचना बेकार या गलत नहीं है

यदि कुछ गलत है तो वह है हीन भावना अपनी गलतियों को सुधार लेना अपनी बुरी आदतों को सही करलेना ही उच्च भावना है उच्च भावना से ही जीवन स्तर ऊपर उठता है सबको माफ़ कर दे और सभी से माफ़ी मांग लेना ही उच्च भावना है इसी भावना से भीतर की असीम शक्ति जाग्रत होने लगती है क्योकि प्रत्येक मनुष्य का सांसारिक जीवन आज है कल नहीं है …सांसारिक जीवन में अमरता नहीं होती अमरता कर्मो में होती है !

अगले ब्लॉग में …..

2 विचार “अपने भीतर की आत्म ज्योति को प्रज्वलित करो – भाग 8 ( Self Inner Lite The Baurn)&rdquo पर;

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