अपने भीतर की आत्म ज्योति को प्रज्वलित करो – भाग 7 (Self Inner Lite The Baurn)

जब कोई व्यक्ति प्रतिदिन उषा काल में ध्यान योग करता है तो उसके भीतर की अलौकिक शक्ति जाग्रत होने लगती है वह स्वयं से जुड़ने लगता है बाहरी सांसारिक माया से वो दूर होने लगता है वह शारीरिक और मानसिक रूप से शक्तिशाली होने लगता है भीतर की नकारात्मक ऊर्जा सकारात्मक होने लगती है उसके सभी ग्रह दोष दूर होने लगते है उसके भीतर का शून्य खुल जाता है सृष्टि का प्रत्येक रहस्य सामने आने लग जाता है ज्ञान की अनुभूति असीमित हो जाती है उस व्यक्ति की सोंच में चमत्कारिक रूप से बदलाव होने लगता है

शून्य का शाब्दिक अर्थ शिव है शिव ही शून्य है सभी जीव शिव है सृटि का एक एक कण शिव यानि शून्य है सभी के अपने अपने कर्म है घास का एक तिनका भी शिव है वही शक्ति सभी के भीतर है

मनुष्य क्रोध में ईस्वर को भला बुरा कहता है वह मनुष्य जीवन में माया को समझ नहीं पाता पृथ्वी पर अवचेतन मन के द्वारा रचित माया को समझने के पश्चात मनुष्य के भीतर असीमित शक्ति सही दिशा की ओर अग्रसारित हो जाती है

ये बात जान ले की जो भी मुसीबत या समस्या है उसके मूल में आप स्वयं है उसे दूर भी आप ही कर सकते है कोई अन्य शक्ति कही से आकर आपकी मदद करने वाली नहीं है क्यों की जिस शक्ति की खोज में आप ना जाने कहा कहा भटकते है वो असीम शक्ति आपके भीतर ही है वही आपकी मदद करती है इसलिए मनुष्य स्वयं अपने भाग्य का निर्माता और विधाता है

मेरी बात पर यकीन ना आये तो आप कुछ महीने प्रतिदिन सच्चे भाव से ध्यान योग करके स्वयं सभी बातो को अनुभव कर लें जो सत्य है वह सत्य ही रहेगा किसी के ना मानने से सत्य को कोई फर्क नहीं पड़ेगा वो जो है वो है

जनसँख्या वृद्धि के कारण सांसारिक जीवन में समस्याएं दिन बा दिन बढ़ती ही जा रही है प्रत्येक मनुष्य कुछ ना कुछ तनाव में जी रहा है हर जगह कम्पटीसन हो रहा है सामाजिक सिस्टम ही कुछ ऐसा है की धन के बिना मनुष्य जीवन अपंग और बेरंग हो जाता है समाज के प्रत्येक व्यक्ति के पास चेतना है सभी के भीतर अवचेतन मन कार्य कर रहा है प्रत्येक मनुष्य अपने सारे कर्म अपने अंदर मौजूद संस्कारो के जरिये कर रहा है सृष्टि सांस और खून के बहाव के जरिये अपना काम करती रहती है

धन की कामना से धन प्रवाहित होता है संतुष्टि की भावना अवरोधक होती है यदि उस संतुष्टि से सुख प्राप्त होता रहे और धन की कमी की समस्या ना हो तो वह सही है अन्यथा वह एक मानसिक विकार और अज्ञानता ही है मनुष्य जीवन पूरी तरह समृद्ध जीवन है समृद्धि आपके चारो तरफ है रुपया पैसा धन आदि चारो तरफ है सकारात्मक रास्ते चारो तरफ है किन्तु मनुष्य अपने मन को समस्याओ पर ज्यादा केंद्रित करता है समस्याएं उसे स्वयं से बड़ी नज़र आने लगती है जबकि ऐसा बिलकुल भी नहीं है मस्तिष्क मन से बड़ा इस संसार में और कुछ भी नहीं होता

कल्पना शक्ति अवचेतन मन की वह पहली शक्ति है जिसके माध्यम से इस सृष्टि की रचना हुई है यदि आप कल्पना शक्ति का प्रयोग करे तो वह कल्पना साकार हो जाती है ये कैसे होता है इसकी चिंता ना करें ये होगा यह विश्वाश रखें हर सफल मनुष्य अपनी योजना की कल्पना करता है उसे साकार रूप में महसूस करता है उसे ही सच मानता है और एक दिन उसे वह पा भी लेता है ..

अगले ब्लॉग में …

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