अपने भीतर की आत्म ज्योति को प्रज्वलित करो – ५ (Self Inner Lite The Baurn)

जो भी आपका सही उद्देश्य है यदि कठिन श्रम और अनेक प्रयासों से भी वो आपको प्राप्त नहीं हो रहा तो जरा स्वयं के भीतर झाकिये कही कोई बाधा है जो आपके सपने को पूरा होने से रोक रहा है मानसिक क्रिया इतनी तीव्र होती है की इंसान कुछ समझ ही नहीं पाता वो अनेक भावनाओ में उलझता चला जाता है सांसारिक जीवन अनुभव और सफलता के लिए होता है अपने उद्देश्य को प्राप्त कर लेना ही सफलता है

जो लोग मानसिक रूप से बार बार विचलित हुआ करते है किन्तु सफलता के लिए कठिन श्रम भी कर रहे है और मन में घोर निराशा हो जाती है ! यहां एक छोटी सी कहानी के माधयम से एक सन्देश देना चाहूँगा ऐसा सन्देश जो किसी भी व्यक्ति के जीवन को पूरी तरह से बदल देने की शक्ति रखता है

एक धार्मिक व्यक्ति था एक बार वो एक नदी के किनारे ध्यान योग के लिए गया वो ध्यान में बैठ गया नदी का किनारा होने के कारण वहाँ शांति छाई हुई थी वो व्यक्ति गहरे ध्यान में चला गया वो अपने इष्ट देव के ध्यान में बैठा था कुछ देर में ही उसके इष्ट देव उसके सामने प्रकट हो गए और उस व्यक्ति से बोले की उसे जो चाहिए वो अभी एक वरदान मांग ले

यह सुनकर वह व्यक्ति बहुत प्रसन्न हुआ उसने कहा हे इष्ट देव मुझे एक ऐसा शक्तिसाली व्यक्ति दे दीजिये जो मेरे प्रत्येक व्यक्तिगत कार्यो को करता रहे और जीवन भर मेरे साथ ही रहे जो मै उसे आदेश करू वो उस कार्य को बड़ी निपुणता से निपटाए!
इष्ट देव ने कहा, मैं तुम्हे एक ऐसा व्यक्ति दूँगा किन्तु वो कभी खाली नहीं बैठेगा उसे हर पल कुछ न कुछ कार्य करने की आदत है यदि वो खाली बैठा तो वो तुम्हे खा जायेगा क्योकि वो एक प्रेतात्मा है यह सुनते ही वह व्यक्ति सोंच में पड़ गया की अब वो क्या करे कुछ सोचते हुए उस व्यक्ति ने कहा ठीक है प्रभु ..

अगले पल वहाँ एक लम्बी भुजाओं वाला भयानक शक्ल लिए एक व्यक्ति प्रकट हो गया, इष्ट देव अब वहा से चले गए इष्ट देव के जाते ही वो भयानक प्रेतात्मा बोला,
मुझे अति शीघ्र बताइये मुझे क्या करना है..मैं बहुत बेचैन हो रहा हूँ …
प्रेतात्मा की यह बात सुनते ही वो व्यक्ति डर गया लेकिन वह बड़ी शीघ्रता से बोला …यहाँ पड़े सभी रेत के कणो की गिनती करके मुझे बताओ
ठीक है अभी बताता हूँ कहते हुए वह प्रेतात्मा रेत के एक एक कणो की गिनती करने लगा कार्य तो अति कठिन था किन्तु प्रेतआत्मा के लिए कुछ भी असंभव नहीं कुछ देर में ही उसने रेते कणो की गिनती करके उस व्यक्ति को बता दिया और कहा की उसे बेचैनी हो रही है उसे दूसरा काम अतिशीघ्र बताया जाये

वह धार्मिक व्यक्ति भी कुछ कम नहीं था उसने प्रेतात्मा से कहा की वो उसे साथ उसके घर चले और रास्ते में पड़ने वाले सभी पेड़ पौधो की गिनती भी करता रहे प्रेतात्मा ने ऐसा ही किया कुछ समय बाद उस व्यक्ति का घर आ गया
घर आते ही उस व्यक्ति ने उस प्रेतात्मा को अनेक कार्य बताये प्रेतात्मा ने उस व्यक्ति के घर के सभी कार्यो को बड़ी शीघ्रता से निपटा दिया शाम हो गयी सूरज डूबने को आया अब कोई काम अधूरा बचा ना था प्रेतात्मा ने उस व्यक्ति से फिर कहा की उसे कोई और काम अतिशीघ्र बताया जाये वो एक पल भी खाली बैठ नहीं सकता उसे बहुत बेचैनी होती है

अब वह धार्मिक व्यक्ति सोचने लगा की अब वो क्या करे उसे इस बात की चिंता होने लगी की कही ये प्रेतात्मा उसे खा ना जाये उसने प्रेतात्मा से प्रश्न किया की,… रात्रि में क्या वो सोता नहीं..? रात्रि तो आराम करने और सोने के लिए है प्रेतात्मा ने उत्तर दिया की वो एक प्रेतात्मा है उसे नींद की जरुरत नहीं होती

यह सुनकर उस व्यक्ति ने उस प्रेतात्मा को घर से बाहर जाकर पूरी रात्रि आसमान के सभी तारो को गिनने का आदेश किया प्रेतात्मा घर से बाहर चला गया और ऊपर आसमान के सभी तारो को गिनने लगा!

घर के भीतर उस व्यक्ति को अब नींद आने लगी थी किन्तु वो प्रेतात्मा के कारण बहुत चिंतित भी था रात्रि के तीसरे पहर तक वो सो गया नींद में जाने के बाद उसे उसके इष्ट देव ने फिर से उसे दर्शन दिया और उस व्यक्ति से उसकी चिंता का कारण पूँछा!उस व्यक्ति ने कारण बताते हुए उस प्रेतात्मा को वापस करने की बात कही लेकिन इष्ट देव ने कहा की वरदान वापस नहीं लिया जा सकता किन्तु इष्ट देव ने उसे एक उपाय जरूर बता दिया

रात्रि बीती सुबह हो गयी प्रेतात्मा अब घर के भीतर फिर आ गया वह व्यक्ति भी नींद से जाग चूका था उसे सपने वाली इष्ट देव की सभी बाते याद थी उसने उस प्रेतात्मा को घर के बहुत से काम बताये प्रेतात्मा ने सारे कार्यो को अति शीघ्र ही ख़तम करके बोला..मुझे जल्दी से कोई दूसरा काम बताओ मुझे बहुत बेचैनी हो रही है !
अगले ब्लॉग में …..

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