अपने भीतर की आत्म ज्योति को प्रज्वलित करो- भाग 4 (Self Inner Lite The Baurn)

मनुष्य शरीर हो या कीट पतंग सभी के भीतर एक चेतना है जिसके कारण कीट पतंग या मनुष्य अपनी जगह से हिलता डुलता है और अनेक कर्म करता रहता है पृथ्वी के भीतर भी एक चेतना है सूर्य के भीतर भी वही चेतना है चेतना या शक्ति समान होती है पृथ्वी लगातार घूम रही है… Continue reading अपने भीतर की आत्म ज्योति को प्रज्वलित करो- भाग 4 (Self Inner Lite The Baurn)