अपने भीतर की आत्म ज्योति को प्रज्वलित करो , भाग-3 (Self inner Lite the Baurn)

किसी भी घर की नींव यदि मजबूत हो तो उस पर अनेक मंजिल तक और भी घर बन जाते है! इसी तरह मनुष्य का मन भी है मन यदि साफ़ और सच्ची भावना से परिूण हो तो वह मन अनेक मंजिलो का सफर पूरा कर लेता है

शक्ति के दो रूप है उसने दृश्य जगत को दो रूपों से बाँधा हुआ है जैसे एक सिक्के के दो पहलु होते है! किन्तु सिक्का एक ही होता है वह परम शक्ति मनुष्य के भीतर ही बिद्यमान है आत्म ज्योति जलाने का मतलब स्वयं को रहस्य के अनेक स्तर तक जान लेना और स्वयं से स्वयं को जोड़ लेना है

यदि आप स्वयं को जान चुके है तो इसका अहम् कभी ना करे क्योकि आपकी तरह ही सभी के भीतर भी वही परम शक्ति बिद्यमान है बस सबकी कार्मिक यात्रा अलग अलग है
साधारण अवस्था में मनुष्य अनेक नजरिये के द्वारा जीवन जीता है किन्तु आध्यात्मिक नजरिया ही सकारात्मक नजरिया होता है

मनुष्य का जीवन और मृत्यु दोनों विशिष्ट घटनाएं है दोनों के आगे सिर्फ जीवनीय यात्रा ही होती है! जीवन कभी रुकता नहीं बस वह एक पड़ाव को पूरा करता रहता है क्योकि जीवन अनंत शक्ति है इसकी यात्रा भी अनंत होती है

जब कोई मनुष्य स्वयं के सच्चे स्वरुप को जान जाता है तो उसके मन की सभी संकाये और भौतिकीय इच्छाएं स्वतः ही मिट जाती है वह हमेशा भीतर से आनंदित रहता है इस अवस्था के बाद जो इच्छा की जाती है वो बड़ी तेजी से पूर्ण होती है

आदिम युग से ही धन के लिए मात्र इस संसार में मार काट मची रहती है किन्तु ऐसे भी लोग है जो अधिक धन संगृहीत में विश्वाश नहीं रखते और वो सम्यक जीवन जीते है तथा शारिरिक और￰ मानसिक रूप से स्वस्थ भी रहते है कोई कितना भी धन एकत्रित कर ले किन्तु वो धन का एक तिनका भी अपने साथ नहीं ले जा सकता

जो कुछ भी आज आपके पास है वो पहले किसी और का था आपके बाद किसी और का हो जायेगा सृष्टि की व्यवस्था ही कुछ ऐसी है पृथ्वी पर मनुष्य जीवन अथवा जीव जगत जीवन सब एक कार्मिक माया है जब मनुष्य पर कोई दुःख आता है तो वह निराश होने लगा है जबकि दुःख सुख मानसिक अवस्था है एक पल आप ख़ुश होते है दूसरे ही पल आप खिन्न हो उठते है सुख दुःख एक भावना है और जीवन के खेल का इक हिस्सा है इसके बिना जीवन अधूरा है

यदि कोई व्यक्ति सोने चाँदी के पलॅंग पर सो रहा है और एक दूसरा व्यक्ति घास फूस की झोपडी में रहता है तो दो अलग अलग दृश्य के कारण हमें दोनों का अलग अलग भाग्य नज़र आता है जबकि उन दोनों के भीतर एक ही शक्ति बिद्यमान है वो एक ही समय में सुख और दुःख दोनों को अनुभव कर रहा है

जितना रहस्य्मयी ये जीवन और भौतिक दुनिया है उससे कही ज्यादा रहस्य्मयी सभी का अवचेतन मन है अपने अवचेतन मन को जानना बेहद जरुरी तथ्य है क्योकि यही प्रत्येक जीवन का आधार है

इंसान को जो चाहिये वो सभी कुछ उसके स्वयं के भीतर ही मौजूद है वो सब कुछ मनुष्य की गहरी भावना में छुपा है जैसे मिटटी के निचे सोना हीरा मोती आदि कीमती धातुएं दबी होती है किन्तु खोदने पर वो प्राप्त हो जाती है मनुष्य का अवचेतन मन एक रडार की तरह काम करता है वो भावनाओ की अलग अलग फ्रीकवेंसी पर अलग अलग परिणाम लाता है

क्युकी मनुष्य और सभी जीव जीवन एक कार्मिक अनंत खेल है इस लिए धन इस खेल का एक जरुरी हिस्सा है किन्तु मायावी मूर्खता की पराकाष्ठा यह है की लोग अधिक श्रम करते हुए भी जरुरी धन प्राप्त नहीं कर पाते धन आता है तुरंत वापस भी चला जाता है

धन हो या कुछ और मैं बार बार कहता हूँ की जरुरी और आवश्यक धन हमारी चेतना में है यानि हमारे अवचेतन मन में है जरुरी धन या पैसा यही से उत्पन्न और विलीन होता है जिस दिन ये बात आप समझ गए आपको धन की कमी कभी नहीं होगी सुख की कमी कभी नहीं होगी

स्वयं को जान लेना ही आत्म ज्योति को प्रज्वलित कर लेना है किन्तु अहंकार ना आने पाए प्रत्येक अहंकार पतन का कारण बनता है ध्यान योग अथवा किसी और माध्यम से अपने अवचेतन के भीतर उतरिये ….वहाँ सब कुछ है सभी बाहरी भौतिक चीजे वही है …वो सभी परिणामो का कारण है वो सभी भौतिक जगत का मूल आधार है वो सूर्य पृथ्वी और असंख्य तारो और सभी दैवी शक्तियो की जड़ है वही सर्वव्यापी है वही असीम है वही रचनाकार है …….
और अगले ब्लॉग में ….

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