खुशी का रहस्य …(The Seacret is happyness)

योग विज्ञान में अथवा आधुनिक चिकित्सा विज्ञानं में खुशी जैसी भावना का सर्वोच्च महत्त्व है!एक कहावत है की इलाज डाक्टर करता है लेकिन ठीक ईस्वर करता है!

दोस्तों,कुछ जरुरी कार्यो की वजह से इस समय अधिक पोस्ट नहीं लिख पा रहा हूँ,लेकिन मैं लिखता रहूँगा …मेरी नयी नयी पोस्ट्स आप तक आती रहेगी भले देर से ही सही,क्योकि लिखना मेरी हॉबी है .इससे मैं दूर नहीं रह सकता ! खुशी एक ऐसी भावना है जिसके बिना मनुष्य जीवन का होना मुमकिन ही नहीं!

माई डियर फ्रैंड्स,जीवन और सारा जगत सब आध्यात्मिक एक और पॉजिटिव रचनात्मक गहरा भाव है और इसका निर्माता स्वयं आनंद से परिपूर्ण एक अवचेतन मन है मन का कार्य है खुशी जैसी भावना में अवस्थित रहना ! जीव जगत ही ईश्वर जगत है चित्त,एक प्रकार की ऊर्जा यानि स्वयं ईश्वर स्वरुप है

चित्त,जिसे महसूस किया जा सकता है खुशी का वो आयाम है जिसे यदि कोई मनुष्य छू ले तो उसका प्रत्येक कार्य ईस्वर का कार्य हो जाता है प्रकृति उस व्यक्ति के अनुसार व्यवहार करना शुरू कर देती है!

आप चाहे उसे ध्यान के माध्यम से छुए या किसी गहरी भावना के जरिए…जो व्यक्ति खिलखिला कर हँसता है पूरी तरह खुल कर हँसता है वह व्यक्ति तन और मन से हमेसा स्वस्थ रहता है बजाय उनके जो..हंसना कम पसंद करते है

हम सभी के भीतर एक शक्ति अवचेतन मन है चित्त उसी अवचेतन मन का एक रूप होता है जो स्वयं ईस्वर है
उसकी प्रकृति आनंद अवस्था है यदि आप उस तक पहुंच जाते है तो आप आनंद सागर में डूब जाते है …आप अपनी परम अवस्था को छू कर अपना मनुष्य जीवन बहुत सकारात्मक और तमाम सफलताओ से परिपूर्ण कर लेते है

ये कोई जरुरी नही की आप ध्यान करेंगे तो ही सफल होंगे या स्वस्थ रहेंगे..आप अपने प्रत्येक कार्यो को सच्चे मन से खुशी खुशी करे ..स्वयं को स्वस्थ महसूस करे ..तो भी आप सफलता और स्वास्थ्य पा सकते है ..लेकिन ध्यान की महिमा अद्भुत है इसे सब्दो में व्यक्त नहीं किया जा सकता!

मनुष्य का सारा जीवन ध्यान ही तो है ..
ध्यान का अर्थ है स्वयं से प्रेम .होना !..स्वयं के भीतर प्रवेश होना ही ध्यान है! स्वयं को जान लेना ही ध्यान है अपने आपको को भीतर से पहचान लेना ही ध्यान है ! मैं बार बार कहता हूँ की सभी जीव, मनुष्य और ईश्वर सब एक है ये सब एक ही शक्ति के बिभिन्न रूप है

जब हमारे मन से सभी नकारात्मक छवियाँ मिट जाती है तो हमारा चित्त हमें दिखाई देने लगता है खुशी एक भावना है एक गहरी भावना स्वयं के भीतर पहुँचिये और देखिये वहाँ क्या है इसका अभ्यास करे धीरे धीरे ये ज्ञान होने लगेगा की आप सिर्फ मनुष्य ही नहीं है आप गरीब नहीं,आप असहाय कमजोर और लाचार भी नहीं है!

आप स्वयं को जो मानते है आप वही होते है …आपकी स्वयं के प्रति जो जिम्मेदारी है उसे आप भुला चुके है स्वयं को जाने बिना आप अपनी सफलताओँ को कैसे जान सकते है ….अपने भीतर की खुसी की और जाइये ..उसका आनंद लीजिए क्योकि वह सिर्फ आपके लिये ही मौजूद है

जैसे पंछियो के लिए खुला आकाश है जैसे दरख्तों और फूलों के लिए मौसम है वैसे ही आपके लिए ये ..सृस्टि का समस्त बैभव है ..आपने समय से कुछ चाहा ही नहीं आपने विस्वाश ही नहीं किया की जो आप चाहते है ..वो सब आपका ही है ..और बहुत जल्द वो आपको मिल जायेगा…अभी तक आप स्वयं को ही ना जान सके ..आप हर पल नकारात्मक भावो में ही डूबे रहे ..सच्चे मन से अपने भीतरी खुशी तक कभी पहुँच ही ना पाए ..कोई बात नहीं अवसर हमेशा आपके सामने होता है …आप स्वयं की खोज करें ..कही इस मायावी संसार में आप स्वयं से दूर तो नहीं चले गए ?

इस वक़्त आपका जीवन जैसा भी हो …अपने भीतर जाकर अपने आपको ढूढ़िये आप कहाँ है ..अपने चित्त अपनी आंतरिक खुशी तक जाइये अपने अवचेतन तक जाइये और देखिये आप पाएंगे की सारी कायनात वहाँ है ..और आप बहुत भव्य तथा सक्तिशाली है .आप उस जगह पहुंच जायेगे .जहाँ से सभी भौतिक स्वरूपों की उत्पति होती है ….

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