नवरात्री स्तुति ! (Devine thauts in mind)

देवी आदि शक्ति की आराधना करने के साथ स्तुति भी जरुरी है क्योकि देवी बाहर तो है ही मनुष्य के भीतर भी है मनुष्य किसी न किसी कामना की पूर्ति के लिए देवी देवताओ की पूजा अर्चना करता रहता है किन्तु उचित स्तुति के आभाव में कामना की पूर्ति नहीं हो पाती !

समस्त देवी देवता अवचेतन शक्ति है इसलिए उनकी अवचेतन मन के स्तर पर ही की गयी स्तुति ही फलित होती है मन के भीतर का प्रत्येक भाव अवचेतन में उठता है और अवचेतन में व्याप्त अनेक संस्कारो के अनुरूप ही भाव भी उत्पन्न होता है
किसी भी प्रकार के आभाव का मतलब है मन के भीतर उस विषय के लिए उचित भाव का ना होना!

नवरात्री देवी माँ आदि शक्ति का अर्चन ध्यान का विशेष कामनाओ को फलित करने का विशेष समय होता है दुर्गा सप्तसती में लिखा है की माँ को जिस रूप में देखोगे माँ उसी रूप को धारण कर मनुष्य के जीवन में आ जाती है

यहाँ बिभिन्न कामनाओ की पूर्ति हेतु कुछ स्तुति का उदाहरण लिख रहा हूँ यदि कोई व्यक्ति इस स्तुति को गहरे मन से पुरे आस्था के भाव के साथ एक प्रार्धना की तरह करेगा तो निश्चित रूप से उसकी कामना की पूर्ति बहुत जल्द होंगी!

0 हे देवी मेरे जीवन में सुख बन कर आप आ जाओ
0 हे देवी मेरे जीवन में आप रोशनी बन कर आ जाओ
0 हे देवी मेरे जीवन में भरपूर धन बन कर आप आ जाओ
0 हे देवी मेरा उत्तम स्वास्थ्य बन कर मेरे जीवन में आ जाओ
0 हे देवी सभी सभी जीवो का कल्याण करो
0 हे देवी मेरा और मेरे परिवार का कल्याण करो
0 हे देवी आप हर पल मेरी सहायता करती हो आपको धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद!

इस तरह आप अपनी कामना के अनुसार स्तुति कर सकते है किन्तु आप कुछ क्रिएट करने जा रहे है तो इसे पुरे मन से करे इतने गहरे मन की शांति के साथ स्तुति करे आपकी स्तुति एक भाव का रूप ले ले,और भाव अवचेतन मन में जब व्याप्त हो जाता है तो वह फलित हो जाता है

आप यदि किसी आत्मग्लानि से पीड़ित है तो इसके पीछे आपका कोई अज्ञान हो सकता है आत्मग्लानि उन्नति में बहुत बड़ी बाधा होती है प्रतेक प्रकार की आत्मग्लानि से खुद को बाहर निकाले,आत्मग्लानि का अर्थ हीनता है!इस जगत में सभी मनुष्य का मूल्य एक सामान है सभी एक है और एक बराबर है और सभी गलतियाँ करते रहते है इसलिए हीनता के अज्ञानता से दूर रहे क्योकि सभी एक पूर्ण मनुष्य है बस अपने बुरे संस्कारो को अपने भीतर से मिटाने की क्रिया में सलग्न रहे एक दिन निश्चित ही आप शिखर पर होंगे!

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