आदि शक्ति ! नवरात्री (Universh In Devine Enargi)

जो जन्म देती है उसे माँ कहा जाता है,जैसे हम सभी का जन्म,सभी भोतिक बस्तुओं और समस्त सृस्टि का जन्म!
माँ शब्द अपने आप में बहुत पवित्र और बहुत शक्तिसाली शब्द है इस शब्द में उत्पति जगत का रहस्य छुपा हुआ है माँ की रचना ईश्वर की सर्वोच्च रचना है इस समस्त जगत में इससे बड़ी और रहस्य्मयी रचना ईश्वर ने कोई और नहीं की है

नवरात्री!यह समय आदि शक्ति माँ के नौ रूपों की पूजा अर्चना का समय होता है माँ के नौ रूपों के अलग अलग नाम है

0 शैलपुत्री
0 ब्रम्ह्चारिणी
0 चंद्रघण्टा
0 कुष्मांडा
0 स्कंदमाता
0 कात्यायनी
0 कालरात्रि
0 महागौरी
0 सिद्धिदात्री

माँ की स्तुति का प्रमुख मन्त्र!
!! यादेवी सर्वभूतेसु शक्तिरूपेण संस्थिता !! नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमो नमः !!

नवरात्री में हम सभी माँ के नौ रूपों की पूजा करते है तथा व्रत भी रखते है!शक्ति एक है पर उसके अनेक रूप तथा अनेक नाम है

आज का आधुनिक विज्ञानं भी अब दबी जुबान से ये मानने लगा है की इस ब्रम्हांड की रचना का केंद्र बिंदु एक ऐसी कोई शक्ति है जो समस्त विज्ञानं से परे है जिसे सामान्य तरीके से समझ पाना असंभव है सिद्ध योगी जन इसे सदियों से जानते समझते आये है

वैज्ञानिक नजरिये की और बात करे तो, विख्यात वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने इस दुनिया को एक सिद्धांत के बारे में बताया था कि,E2 MC ￰स्क्वायर ! इसका अर्थ है की बाइब्रेशन से एनर्जी एनर्जी से मैटर की उपति!

बाइब्रेशन यानि शून्य यानि शिव और शिव से उत्पन्न एनर्जी जिसे हम शक्ति कहते है तत्पश्चात शक्ति से भौतिक चीजों की उत्पत्ती!सभी भौतिक चीजे जैसे समस्त ग्रह तारे पञ्च तत्व मनुष्य और सभी जीवों का शरीर आदि , सभी कुछ एनर्जी से बने है इनकी उत्पति एनर्जी से हुई है

अध्यात्म में शिव और शक्ति को एक दूसरे का पूरक और एक दूसरे में विलीन बताया गया है साफ़ शदो में कहे तो शिव लिंग का प्रतीक इसी आधार पर निर्मित है दोनों एक दूसरे में समाये हुए है

जब बात होती है आदि शक्ति माँ की तो ,वो एक निर्गुण निराकार एनर्जी है जिनका कोई रूप रंग नहीं है वो मनुष्य की सोंच के अनुसार अपना रूप धारण कर उसके जीवन में आ जाती है जैसे कोई सोचता है की मैं बहुत परेशान हूँ तो माँ उसके जीवन में वही रूप लेकर आ जाती है

ये कठिन सत्य है की दैवीय शक्ति बाहर ही नहीं मनुष्य के भीतर भी विद्यमान होती है वो तो शक्ति है शक्ति का जिस रूप में प्रयोग किया जायेगा परिणाम भी वैसा ही उत्पन्न होगा ! माँ कभी किसी भी जीव या मनुष्य का अहित नहीं चाहती वो तो मनुष्य की प्रत्येक भावना में घुल मिल जाती है

मनुष्य को चाहिए की वो अपनी भावनाएं शुद्ध और पवित्र रखे! जिससे उसे माँ की असीम अनुकम्पा प्राप्त हो सके!
मैं बार बार ध्यान मैडीटीशन की बात क्यों करता हूँ सायेद अब आप समझ चुके होंगे ध्यान मन के सभी विकारो को नस्ट कर देता है किन्तु ध्यान प्रत्येक दिन करना चाहिये जिससे आप हर दिन बाहरी नकारात्मक सक्तियो से सुरछित रहे! और आपका मन प्रत्येक पल पवित्र बना रहे !

नवरात्री का समय माँ आदि शक्ति का विशेष समय होता है नवरात्री के समय तथा नवरात्री के बाद भी जीवन भर अपने मन को शुद्ध और पवित्र रखने वाले सभी कर्मो को करते रहे
माँ की कृपा से जीवन की हरेक खुशहाली आपके जीवन में हमेसा बनी रहेगी! यही चमत्कार है अपने मन को पवित्र रखना ही माँ की सबसे बड़ी पूजा अर्चना है

व्रत का अर्थ है कि, किसी भी प्रकार के नशे का परित्याग मन के भीतर व्याप्त सांसारिक ईर्ष्या, क्रोध,बदले की भावना,लोभ अति मोह माया की भावना का परित्याग ! और सच्चे मन से सबको माफ़ कर देना और सभी से माफ़ी मांग लेना ही व्रत रखना है! क्योकि गलतियाँ दोनों तरफ से होती है

जब आप ऐसा करते है और हर दिन सबकी भलाई की ही कामना में लीन रहते है तो इसे ही पिछले कर्म को काटना कहते है आपका मन सभी विकारो से मुक्त होकर शून्य हो जाता है यही से आपका भाग्योदय होना शुरू हो जाता है अब आप दैवीय कृपा के पात्र हो जाते है आप पर दैवीय कृपा असीमित और स्थाई रूप से बरसने लगती है !

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