समय बहुत महत्त्व पूर्ण है ! (Very importent is time)

अगर सही कहा जाये तो किसी भी चीज की व्याख्या करना एक कठिन काम होता है!और जो अनंत है असीम है उसकी परिभासा भी असीम और अनंत होती है! समय अनंत है असीम है!सभी जीव जन्तुओ और मनुस्यो को जीवन समय उनके अपने लिए बहुत महत्त्व पूर्ण होता है!

समय गुजर जाने बाद पछतावा ही रह जाता है कोई भी योजना समय के अनुसार बनाई जाती है क्योंकि जो सच अभी मौजूद नहीं है किन्तु इस संसार में उसे सच करके दिखाना ही योजना है!एक ऐसी चीज जो अभी शून्य है अभौतिक है उसे भौतिक जगत में साकार करना ही किसी योजना का मूल सार है!

समय भी शून्य है मनुष्य का भौतिक शरीर पांच तत्वों का मिश्रण है इसके संसार में प्रकट होते ही इसका समय शुरू हो जाता है और इसके नस्ट होते ही उस शरीर का समय भी ख़त्म हो जाता है!यदि आप 95 वर्ष के है और आप ये सोचते है की अब मैं बहुत बड़ा बिज़नेस मैन बन जाऊ या मै देश का प्रधान मन्त्री बन जाऊ या मेरी 25 वर्षीय किसी नवयुति से विवाह हो जाये और हम दोनों सुखी रहे तो क्या ये संभव है? जी बिलकुल संभव है किन्तु कैसे,आइये सृस्टि के रहस्यों की ओर चलते है!

सृष्टि के लिए कुछ भी असम्भव नहीं क्योकि प्रत्येक इंसान और सभी चीजे सृष्टि के गोद में ही उत्पन्न है जब कोई 95 वर्षीय बूढ़ा व्यक्ति इस तरह के सपने देखता है तो सृष्टि उस व्यक्ति की आस्था के अनुरूप उसे अगले जनम में उसकी सबसे प्रबल इच्छा को पहले पूर्ण करती है!सृस्टि उस मनुष्य के शरीर को बदल देती है यानि अगला जनम!

अगले जन्म के लोग उसकी कामयाब्बी को देखते है और कहते है की देखो ये कितना भाग्यसाली व्यक्ति है!सृस्टि अपने नियम कभी नहीं तोड़ती, वो अपने नियम तभी तोड़ती है जब सृष्टि का पुनर्निर्माण होना होता है!यदि समय रहते कोई कामना की जाये तो वो इसी जनम में साकार होती है और समय निकल जाने के बाद की सभी कामनाये अगले जनम में फलीभूत होती है!

सृष्टि प्रत्येक शरीर की जननी है इसलिए उसे यह पता होता है की इस जीवन में अब आपके पास समय कितना बचा है!वो आपकी कामनाओ को नहीं बदलती बस आपके शरीर को बदलती है!एक आम जिंदगी में जैसे कोई मनुष्य ऑफिस के लिए कुछ और कपडे पहनता है किन्तु किसी शादी व्याह के लिए पुराने कपडे छोड़कर नए कपडे पहनता है!

यदि किसी की कोई विषेस कामना है तो उसे समय रहते पूरा करे और अपनी कामनाओ को परखे की क्या आपने जो कामना की है उसके लिए वक़्त है इस लिए सही तरीके से कामना करे !इसी को लॉ ऑफ़ अट्रेक्शन कहा जाता है!बहुत सी और भी तमाम इच्छाएं होती है जो 95 की उम्र में साकार हो सकती है किन्तु सभी नहीं उसके लिये शरीर रूपी कपडे को चेंज करना होता है !

समस्त इच्छाएं अलग अलग भावनाये होती है शरीर मिट जाता है लेकिन इच्छाएं जीवित रहती है इन्ही इच्छाओ और भावनाओँ को संस्कार कहते है!प्रतेक मनुष्य का कर्तव्य है की वो अपनी जिंदगी को जी भरकर जिए क्योकि आप यहाँ जीने के लिए प्रकट हुए है! सभी जीवो के लिए सृस्टि की सारी नियामते पहले से ी फ्री में उपलब्ध रहती है

मनुष्य प्रकृति के उदार रवैये का गलत तरीके से इस्तेमाल करना चाहता है वो समयानुसार कोई कामना नहीं करता पढ़ने लिखने की उम्र में ढंग से पढता लिखता नहीं धन प्राप्ति होती है तो बेमतलब की चीजों में उसका अपव्यय करता रहता है मनुष्य जितना बुढ़ापे में अपने शरीर की देखभाल करता है उतना यदि युवावस्था में अपना खान,पान सही रखे तो बुढ़ापे में भी वो स्वस्थ रह सकता है!

समय बहुत कीमती है समय के साथ चलने में ही बुद्धिमानी होती है जो समय बीत जाता है वो उसी जीवन में फिर से वापस नहीं पाया जा सकता ! किसी भी पछतावे से अच्छा है की हम अपनी समस्त कामनाये और समस्त कार्य समय से करे!अपने समय के अनुसार ही अपनी योजनाए निर्धारित करे ऐसी कामनाये एक ही जीवन में निश्चित रूप से पूर्ण हो जाती है

आपकी उम्र आपकी परिस्थिति कुछ भी हो!अपनी उम्र और परिस्थिति के अनुसार छोटी छोटी योजनाए बनाएं और श्रृंखला बद्ध तरीके से उन्हें लिख ले अपनी एक योजना के पूरा होने तक किसी दूसरे योजना की कामना न करे दूसरी कामना को लिखकर रखे और पहली कामना के पूर्ण होने पर दूसरी किसी विषय की कामना और उस पर कार्य करे छोटी छोटी योजनाए ही बड़ी योजना में तब्दील होती है यही अपने समय का सही उपयोग करने और सही जीवन जीने का तरीका होता है!

अगले ब्लॉग में हम लॉ अट्रैक्शन और उसके प्रयोग के सही तरीके के बारे में जानेगे!

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