शीघ्र सफलता के लिए आज से ही ये करना शुरू कर दें !

जब हमारे कपडे गंदे हो जाते है तो उन्हें फिर से बार ,बार साफ़ किया जाता है! जब हमारे नाखून बढ़ जाते है तो उन्हें बार बार काटा जाता है हम रोज ब्रश करके अपने जूतों को चमकाते रहते है ! हर रोज सुबह उठकर अपने गंदे दातो को भी चमकाने की कोशिश करते है !!

हम बालो में तैल लगाते है साफ़ कपडे पहनना पसंद करते है अपने घर के भीतर भी बड़ी साफ सफाई रखते है! हम इन चीजों का बड़ा ख्याल रखते है बाहर की सभी चीजों पर हमारी बड़ी पैनी नज़र होती है!

इन सब कार्यो के पीछे एक चीज मैला और अधूरा रह जाता है जिसकी सफाई पर हमारा ध्यान ही नहीं जाता ! और यदि कभी ध्यान गया भी तो हम उसकी सफाई जरुरी नहीं समझते!जबकि सब कुछ वही से हो रहा है!
हमारा मन!

इसे भी थोड़ा थोड़ा हर दिन साफ करते रहने से ये तेजस्वी होने लगता है जिससे शरीर स्वस्थ और सबल होने लगता है आप का सबसे बड़ा और सबसे नजदीकी साथी कौन है,हमारा मन, हमारा शरीर!

सवाल ये है की अपने मन को अपने हिसाब से कैसे निर्मित करे क्योकि बचपन से अनेको घटनाये दृश्य और भाव इसमें एक मान्यता एक विस्वास बनकर बैठ गए है जो हमारे काम के बिलकुल भी नहीं होते!बल्कि ये हमारी सफला के बहुत बड़े बाधक होते है!

दोस्तों, मन को भरपूर सकारात्मक करने और उसको सही दिशा प्रदान करने के लिए कुछ अभ्यास कर्म करने होते है
जिसे मैं यहाँ प्रमुख रूप से उल्लेखित कर रहा हूँ इसे हर दिन प्रयोग करे और आस्था बनाये रखे जिससे आपका अवचेतन मन आपके लिए उचित और शीघ्र सफलता के परिणामो को उत्पन्न कर सके!

0 मैं सर्वसक्तिमान हूँ
0 मैं सफल हूँ
0 मैं मनी मैगनेट हूँ
0 मैं शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हूँ
0 मैं बलवान हूँ
0 हर वक़्त मेरे पास बहुत सारा धन मौजूद रहता है
0 सृस्टि हर समय मेरी मदद करती है
0 मेरे सारे कार्य समय से पूर्ण हो जाते है
0 मैं इस संसार में अत्यंत सफल व्यक्ति हूँ
0 मै इस पृथ्वी पर सबसे सुखी व्यक्ति हूँ
0 मैं बहुत बुद्धिमान व्यक्ति हूँ
0 संसार बहुत ही अच्छा है
0 मैं परोपकारी व्यक्ति हूँ
0 सभी जीव जंतु और इंसानो से मुझे प्रेम है
0 मैंने सभी को माफ़ कर दिया है और सभी लोगो ने मुझे माफ़ कर दिया है
0 मैं अपने जीवन के सभी रोल को बहुत अच्छी तरह निभाता हूँ
0 सारा जगत मुझमे में ही मौजूद है
0 मेरी साँसे मेरी गुरु है
0 जीवन के सभी उत्तर मेरे अवचेतन मन में मौजूद है
0 मेरा मन पवित्र और निर्मल हो चूका है
0 मैं हर पल इस्वर के साथ एकरूप हूँ

दोस्तों, ऊपर दिए शब्दो को अपने हिसाब से चुनिए और उन्हें प्रतेक दिन अपने मन में दोहराये इसके लिए सुबह का समय सबसे उचित समय होता है तत्पश्चात रात्रि सोने से पहले इसे दोहराएं और इन सब्दो के सार को दृश्य बनाकर देखे इन सब्दो की गहराई में जाये !जिससे आपके मन में यह भाव बनकर बैठ जाये ऐसा हो जाने पर आप अपनी जिंदगी में आने वाले बदलाव को स्वयं देखेंगे!

इसकी आदत बनाये हर दिन इसका अभ्यास करे किसी भी चीज को आदत बनने में 20 से 30 दिनों का समय लगता है

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