सृस्टि के अकाट्य नियम!

आप एक गेंद को लीजिये उसे ध्यान से देखिये वो हमारी पृथ्वी के जैसा गोलाकार स्थिति में होता है! मान लीजिये गेंद का सबसे ऊपरी भाग टॉप लेवल स्थिति A है! गेंद के सबसे नीचे की स्थिति B स्थिति है गेंद का लेफ्ट डाउन C है तथा गेंद का राइट डाउन स्थिति D है!

ये हमारी पृथ्वी है जिसपर हम सभी जीवन जी रहे है ब्रम्हांड में पृथ्वी के साथ हम भी सूर्य की लगातार परिक्रमा कर रहे है ! क्या आपको पता है की आप गेंद के किस भाग पर है स्थिति ,यानि भाग A,भाग B भाग C या भाग D पर￰ किधर ,यदि आप भाग A पर है तो कोई बात नहीं लेकिन यदि आप भाग B या C या D पर है तो आप खतरे में है !

आपका घर, आपकी फैक्टरी, आपका ऑफिस आपकी गाड़ी सब कुछ हवा में झूल रहे है आप स्वयं भी लटके हुए हो आपके आस पास की नदिया समुद्र जीव जंतु खेत खलिहान सब कुछ हवा में झूल रहे है किन्तु ….

किन्तु किसी ने उन्हें थाम रखा है आपको भी किसी ने पृथ्वी से जोड़ रखा है ताकि आप ब्रम्हांड के अँधेरे में इस पृथ्वी से गिर कर कही खो ना जाओ!घूमती पृथ्वी के नीचे लोक को पाताल लोक कहा गया है इस ब्रम्हांड में हमारी पृथ्वी हमारे ब्रम्हांड के जैसे अरबो सूर्य पृथ्वी गैलेक्सी और ब्रम्हांड मौजूद है!

हमारी मानवीय सोच से परे एक ऐसी बुद्धि एक ऐसा विज्ञान एक ऐसा मास्तिष्क इस समस्त ब्रम्हाण्ड को संचालित करता है जिसका नाम शून्य है!इस शून्य में बहुत कुछ छुपा हुआ है जिसे हम शून्य खालीपन कहते है वो एक शून्य नहीं एक अवचेतन मन है और सभी मनुष्य जीव जंतु उस शून्य का हिस्सा है यानि हम सब भी शून्य और अवचेतन है!

इस मनुष्य जीवन मेँ यदि कोई खेल खेलना हो तो हमें एक मैदान या किसी ख़ास जगह की जरुरत होती है कुछ वस्तुओ तथा कुछ लोगोँ की भी जरुरत होती है फिर हम कोई खेल खेल पाते है!क्या ये सृस्टि इक खेल नहीं है क्या हम सभी किसी खेल का हिस्सा नहीं है?

समस्त बुद्धि एक विज्ञानं है परमात्मा अवचेतन शक्ति भी विज्ञानं है सब कुछ एक विज्ञानं ही है,ऐसा ज्ञान जो दिखाई नहीं देता फिर भी उसे भौतिक बस्तुओ के माध्यम से लेब्रोटरी में ढूंढने का प्रयास किया जाता है! पत्ते और डालियाँ तो मिल जाती है किन्तु जड़ तक पहुंच पाना हमेसा ही मुश्किल होता है!

अग्नि को चाहे कोई शिशु छुए या नौजवान या कोई वृद्ध उसकी उंगलिया जल जाएगी,उचाई से कुछ भी गिरे पत्थर या मनुष्य वो नीचे ही गिरेगा,वो और ऊपर की ओर नहीं जायेगा मन के भीतर के भाव ही जीवन में किसी घटना का रूप लेते है यही विज्ञानं है यही सब सृस्टि का नियम है!

जीवन मृत्यु,अँधेरा उजाला,अग्नि जल,वायु आकाश,पृथ्वी और ऊर्जा,शिव और शक्ति जीवात्मा और परमात्मा सभी एक दूसरे में समाये हुए है तथा एक ही सिक्के के दो अभिन्न भाग है सृस्टि के सभी नियम अकाट्य है!

क्या दो जीवात्माओ का मिलन शिव और शक्ति का मिलन नहीं है? जहा शिव और शक्ति न हो वहाँ किसी तीसरे जीवन का जन्म भला कैसे हो सकता है!पृथ्वी पर सभी जीवन एक खेल है,सभी घटनाये एक नाटक नौटंकी सामान होते है! कुछ समय बाद लहरे थम जाती है सब कुछ कालातीत हो जाता है! सभी नाट्य रंग समय के भीतर विलीन हो जाते है!
सृस्टि का नियम भौतिक चीजों को उत्पन्न करना है !जैसे मनुष्य या किसी दूसरे जीव के शरीर तथा किसी बस्तु की रचना करना फिर उसे नस्ट करना! ऊर्जा अभौतिक है वो जन्म मृत्यु से परे है!उसका कार्य है किसी ना किसी रूप को धारण करते रहना और लगातार गतिमान रहना!

मनुष्य का अपना मन ही उसका सारथी होता है वही मनुष्य का उद्धारक और संहारक है! सभी अभौतिक शक्तिया मनुष्य के भीतर ही होती है शिव और शक्ति यानि शून्य और ऊर्जा स्वयं ही समस्त जीव है समस्त मनुष्य है जैसे एक टूटे हुए सीसे के कई टुकड़े सीसे ही होते है जैसे किसी समुद्र से अलग हुआ तमाम जल समुद्र से अलग होकर भी जल ही होता है!
तत्पश्चात फर्क ये हो जाता है की सीसे के अलग अलग टुकड़ो पर अलग अलग संस्कारो के निशान लग जाते है इस लिए वे एक दूसरे से भिन्न रूप में दिखाई देने लगते है!यह सब सृस्टि के खेल का एक नियम ही तो है!

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2 विचार “सृस्टि के अकाट्य नियम!&rdquo पर;

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