अवचेतन￰ मन और धन!(Subconsias mind and mony)

इस टॉपिक पर जितना भी लिखा जाये कम ही लगता है बहुत सी बारीकियां बहुत सी पर्ते खुलनी जैसे बाकि रह जाती है!,चूकि मनुष्य को जन्म से लेकर मृत्यु तक धन की जरुरत होती है ! हमारा सामाजिक ताना बाना ही कुछ ऐसा है की कोई इससे बच ही नहीं सकता!!बचपन में धन की पूर्ति माता पिता अभिभावक करते है!तत्पश्चात स्वयं को करना पड़ता है
बहुत से लोगो को ये लगता होगा की मैं हमेशा अवचेतन मन की बातें क्यों करता रहता हूँ!

अपने देखा होगा सुना होगा की हमारे आस पास के कुछ धूर्त टाइप के लोग बहुत जल्दी धन दौलत समृद्धि प्राप्त कर लेते है वही एक ईमानदार व्यक्ति जीवन भर कठिन श्रम करके भी सफलता के उस स्तर तक नहीं पहुंच पाता और संसार से ऐसे ही चला जाता है अपने परिवार समाज को कोई प्रेरणा नहीं दे पाता,अमीरी का वातबरण नहीं दे पाता

धूर्त टाइप के लोगो के भीतर भी अवचेतन मन होता है और एक सामान्य जीवन जीने वाले के पास भी अवचेतन मन होता है फिर दोनों के जीवन में इतना फर्क क्यों?
ऐसा नहीं की ईमानदार लोग सफलता नहीं प्राप्त करते लेकिन उनका प्रतिशत कम क्यों होता है! मेरा कहने का सार ये है की दोनों ही मनुष्य है ! एक ईमानदार व्यक्ति ज्यादा शारीरिक श्रम करता है क्या उसके पास कोई योजना नहीं होती कोई विचार नहीं होता या वो मानसिक रूप से दुर्बल होता है?

एक बहुत बड़ा फर्क ये होता है की ईमानदार व्यक्ति की धन की चाहत के ठीक सामने एक पूर्ण विराम लगा होता है संतोष के भाव का पूर्ण विराम, और यही वो मात खा जाता है वो स्वयं को भीतर से बदलना ही नहीं चाहता,उसे संघर्ष का सही तरीका पता नहीं चल पाता,संतोष का एक अमिट भाव उसके अवचेतन में कुंडली मार कर बैठा हुआ होता है !
इंसान की इच्छाएं ही उस इंसान को जीवित रखती है यदि आसाये,उम्मीदें सपने और संघर्ष किसी भी इंसान के भीतर से ख़तम हो जाये तो उस व्यक्ति का जीवन भी बहुत तेजी से ख़तम होने लगता है !एक व्यक्ति जिसे धूर्त कहा जाता है उसको ये पता होता है की उसे मंजिल कैसे मिलेगी उसके अवचेतन मन में सफलता की प्रबल उम्मीद लगातार कायम रहती है वो बहुत जिद्दी किस्म का होता है वो अपने सपनो से कभी समझौता नहीं करता !

एक ऐसा व्यक्ति जिसकी सामाजिक छवि बहुत अच्छी होती है लेकिन उसके पास धन की कमी होती है और वो धन के प्रति आलसी भाव रखता है एक दिन वो बहुत पीछे रह जाता है लोगो को लगता है की जो अधिक धनवान है वो धूर्त है अथवा ठग है इसलिए वो अमीर है जब की ईमानदार व्यक्ति बहुत ईमानदार है इस लिए वो गरीब है !

लोगो की सोंच का कोई इलाज नहीं,जैसे पानी में जो भी रंग डाला जाता है पानी का रंग बदल जाता है मनुष्य मन भी कुछ ऐसा ही हो जाता है! ये सत्य है की इस संसार में जीने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को लगातार धन की जरुरत होती है ईमानदारी से कोई भी कार्य करते हुए यदि किसी विपरीत परस्थितियो से निराश ना हुआ जाये अपने सपनो से कभी समझौता न किया जाये तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं होती!और जीवन के सारे कार्यकलाप सफलता, असफलता सब अवचेतन मन से होते है इस लिए अपने अवचेतन मन को सही दिशा प्रदान करने की जरुरत होती है!

प्रत्येक हरा भरा पेड़ किसी दिन एक छोटा सा पौधा ही मात्र था! एक बूढ़ा या नौजवान व्यक्ति किसी दिन एक छोटा सा शिशु मात्र था!सब कुछ जीरो से शुरू होता है चाहे वो सफलता की बात हो, धन प्राप्ति की बात हो या कुछ और! लोग जीरो से डरते हैं, उन्हें नहीं पता की यहाँ सबकुछ शून्य ही है और शून्य से सब उत्पन्न होता है! तथा सबकुछ वापस शून्य में परिणित हो जाता है

परम पिता परमात्मा अवचेतन मन की बात को समझता है क्योकि वह स्वयं सर्वव्यापक एक अवचेतन शक्ति है मनुष्य के अवचेतन मन में जो कुछ भी होता है उसके जीवन में वही सब कुछ घटित होता रहता है!और ये अकाट्य सत्य है चाहे वो पूर्व जन्म का दबा संस्कार हो या इस जन्म का !
इस पृथ्वी पर सभी के लिए चारो तरफ धन ही धन बिखरा पड़ा है ! इस पृथ्वी पर सभी के लिए चारो तरफ अवसर ही अवसर मौजूद हैं! क्या आज तक कभी किसी को धन कमाने, सफलता प्राप्त करने से परमात्मा ने यहाँ आकर रोका ?

परमात्मा किसी के कार्य में कभी भी कोई हस्तछेप करने नहीं आता,,सभी को पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त है वो तो अवचेतन है और प्रत्येक मनुष्य के भीतर ही है मनुष्य के संस्कार उसका संकल्प उसके सफलता और असफलता का कारण बनते है!यदि सफलता धोखे से प्राप्त की गयी हो तो ऐसी सफलता कुछ दिनों की मेहमान होती है! ईमानदारी से प्राप्त सफलता ही स्थाई होती है ! यदि कोई ईमानदार व्यक्ति अपनी सफलता के मार्ग से हटे ना,डरे ना,निराश ना हो,और
स्वयं से कोई झूठा समझौता ना करे तो सफलता उसके लिए उसी प्रकार निश्चित होती है जैसे रात्रि के बाद सूर्य का निकलना एक मौसम से दूसरे मौसम का बदलना पेड़ों में फल आना फूलो में सुगंध का आना !!

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