प्रार्थना में इतनी शक्ति क्यों होती है ?(The Power In Preyar)

जब कोई व्यक्ति किसी रोग के कारन गंभीर हालत में होता है हॉस्पिटल के लोग कहते है की हिम्मत रखो,और दुआ करो की ये जल्दी ठीक हो जाये!
जब कही आपात स्थिति होती है जैसे भूकंप, बाढ़, महामारी तो उस समय सभी लोग एक अनजान शक्ति से सब कुछ ठीक होने की प्रार्थना करते है! ऐसा करके उन्हें सुख शांति का अहसास होता है!और प्रार्थना यदि हृदय से की गयी हो तो प्रार्थना का उन्हें लाभ भी मिलता है!

प्रार्थना अन्तःमन की एक पवित्र अवस्था है!यदि प्रार्थना में उस काम के होने का पूर्ण विश्वास हो तो वो कार्य निश्चित पूर्ण होता है!विश्वास के अभाव में हर प्रार्थना अधूरी होती है ! विचित्र बात ये है की प्रार्धना करने वाला और प्रार्थना को सुनने वाला दोनों एक ही होते है! मनुष्य का चेतन मन प्रार्थना करता है और उसी मनुष्य के स्वयं का अवचेतन मन ही उस प्रार्थना को स्वीकार करता है!

सभी शक्तिया मनुष्य के पास ही होती है!लेकिन निगेटिव संस्कारों की वजह से मनुष्य अज्ञानता के अँधेरे में डूबा रहता है!प्रार्थना का यह मतलब बिल्कुल नहीं की दूर आसमान में बैठा कोई परमेस्वर आपकी प्रार्थना को सुनता है!उसे आप जितना स्वयं से दूर समझते है वो उससे कहीं ज्यादा नज़दीक स्वयं आपके भीतर ही रहता है!

प्रार्थना कभी भी कही भी की जा सकती है! ये संसार आध्यात्मिकं संसार है किसी न किसी रूप में प्रत्येक मनुष्य इसका अनुसरण करता ही है! क्यों की जीवन का आधार ही अध्यात्म है! निरामय जंगलो में रहने वाले आदिवासी बहुत आध्यात्मिक होते है इस विषय में वो जरा भी लॉजिक नहीं लगाते!यही कारण है कि अनेक मांसाहारी जीवो के बीच घने जंगल में भी वे खुशी खुशी अपना जीवन व्यतीत कर लेते है!

मन की प्रत्येक भावना एक प्रार्थना के सामान होती है अपनी भावनाओं पर नज़र रखें! जब कोई व्यक्ति किसी कामना विशेस के लिए प्रार्थना करता है तो ही उसे लगता है की वो प्रार्थना कर रहा है!इसे प्रार्थना नहीं इच्छा कहते है! ये बस किसी भावना का बढ़ा हुआ एक रूप होता है !

मनुष्य की समस्त कामनाये प्रार्थना ही होती है यदि वो अवचेतन में कल्पित हो तो साकार हो उठती है ! चेतन मन के स्तर पर कोई भी विषय साकार नहीं होता ! ये उस प्रहरी की तरह कार्य करता है जो हर किसी को घर के आँगन में जाने से रोकता है ! और जब ये किसी को भीतर जाने देता है तो वो विषय अवचेतन से एक हो जाता है!तब प्रार्थना का पूर्ण रूप साकार हो जाता है !

ये संसार इच्छा और कामनाओ का संसार है!बस उसके रूप हज़ारो होते है!प्रत्येक वैरागी को ईस्वर प्राप्ति की इच्छा होती है किसी को जन्म मृत्यु के बन्धन से मुक्ति पाने की इच्छा होती है! किसी को धन , सफलता आदि , सबकी अलग अलग इच्छाएं होती है ! कोई इससे अलग हो ही नहीं सकता!

सभी जीवों का अवचेतन मन ही हमारे जीवन तथा इस सृस्टि जगत का (शून्य) मूल आधार है! सभी कुछ एक दूसरे से जुड़े और एक दूसरे में विलीन है किसी से अलग तो एक तिनका भी नहीं होता!बस फर्क ये है की ये सामान्य दृस्टि में एक दूसरे से अलग दिखाई देते हैं!

प्रार्थना एक चुम्बक की तरह कार्य करती है जब ये मन की गहरी अवस्था से उत्पन्न होती है तो चमत्कार सा हो जाता है !सब कुछ अवचेतन जगत है हमें हमारा शरीर तो दिखाई देता है किन्तु मन दिखाई नहीं देता,क्योकि ये शून्य है अवचेतन है!आधुनिक विज्ञानं इसे Subconsias Mind के नाम से जानता है! सिद्ध योगी इसे शिव और शक्ति के रूप में पुकारते है!

हमें प्रतिदिन दिन सबकी भलाई की प्रार्थना करनी चाहिये!
और हर पल उस ईस्ट को धन्यवाद देना चाहिये जो हमारा सबसे करीबी है जो हर पल हमारे ही भीतर हमारे साथ ही रहता है!

Advertisements

3 विचार “प्रार्थना में इतनी शक्ति क्यों होती है ?(The Power In Preyar)&rdquo पर;

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s