अवचेतन का प्रयोग और प्रभाव! (subconsias mind and efacte in life)

हर किसी के पास दो रास्ते होते है,किसी भी चीज को मानना या ना मानना! मानना मतलब विश्वास करना या न करना! और मजे की बात ये है की, मन की प्रत्येक स्थित पर अवचेतन शक्ति काम करती रहती है!
आज का युग विकास शील युग है बढ़ती जनसँख्या के कारन जीवन के कर्म अस्त व्यस्त हो गए हैं! हर तरफ आपा धापी दिखाई देती है! ऐसे में एक कोई एक व्यक्ति शांत मन से कैसे रह सकता है!

एक कहावत है की देखा देखि पुण्य और देखा देखि पाप!ये बड़ी सारगर्भित ध्यान देने वाली बात है!
मनुष्य का अवचेतन मन एक शांत चित्त अवस्था है! क्या आपको पता है की आप एक समपूर्ण मनुष्य किस समय में होते है!जब आपका चित्त शांत होता है आप विचार शून्य स्थिति में होते है बस उसी समय! ऐसे तो हर समय मन के भीतर खिचड़ी ही पकती रहती है, जो आपको मंजिल से ब्रहमित बना कर रखती है! और आप समय से अपनी मंजिल तक नहीं पहुँच पाते!

पूर्णता की अवस्था में ही आपके सभी कार्य पूरे होते है !
अपूर्णता की स्थित में किये गए सभी विचार कल्पनायें अपूर्ण कार्यों को ही प्रकट करते है !
पूर्णता की स्थित अवचेतन की अवस्था है! अपूर्णता की स्थित चेतन मन की अवस्था होती है!इस लिए आप जब भी कोई योजना बनाये तो अवचेतन की पूर्ण अवस्था में जाकर ही बनाये तभी वो फलित होगा!चेतन मन से सिर्फ चिंतन करे की आपको आगे क्या पाना है और कहा पहुँचना है !

स्वयं को वक्त दें!वक़्त तो देना ही पड़ेगा!मनुय का अवचेतन मन एक दैवीय शक्ति या चेतना है जो सही कमांड पाकर कुछ भी उत्पन्न कर सकती है! इस संसार में आज तक जितने भी लोग सफलता के शिखर पर पहुंचे है चाहे वो किसी भी छेत्र से हो जाने अनजाने वो सभी अवचेतन के रास्ते से ही शिखर तक ही पहुँचे है!

किसी को अपने अवचेतन से दूर जाने का कोई उपाय भी नहीं है!क्योकि की अवचेतन की शक्ति से ही हर मनुष्य जीवित रहता है ! दिल की धड़कन रक्त का प्रवाह सांसो की क्रिया भोजन का पाचन आदि सभी कुछ अवचेतन शक्ति के माध्यम से ही हो पाता है! अवचेतन शक्ति ही सम्पूर्ण जीवन का आधार है! यही प्रत्येक योजना को भौतिक रूप में प्रकट करता है!इसे ईश्वरीय चेतना कहा जाता है इसलिए प्रत्येक मनुष्य स्वयं ईस्वर ही है!

हमें नहीं पता की हम क्यों और कैसे इस पृथ्वी पर अचानक प्रकट हो गए,किन्तु अवचेतन में इसका रहस्य छुपा है वो सभी सवालों के उत्तर जानता है ! वो आपकी हर बीमारी का ईलाज कर सकता है!जब आप उसके पास जाकर उसे कोई सीधा सीधा विचार देंगे!

अवचेतन किसी भी विश्वास का दूसरा रूप होता है!आपके भीतर का विस्वास ही आपका अवचेतन है!तत्पश्चात इसे आप किसी भी धर्म से, किसी भी नाम से पुकारे! इससे कोई फर्क नहीं पड़ता ! ये वो शक्ति है जो सम्पू्ण विश्व को चलाती है ये सूर्य की रोशनी है ये चन्द्रमा की शीतलता है यही इस ब्रम्हांड का आधार और ब्रम्हाण्ड की मूल चेतना है!भारत वर्ष के सिद्ध योगी इसे शिव के नाम से जानते है!

इस ब्रम्हांड का अवचेतन ही मनुष्य का अवचेतन मन है और सभी जीवो की चेतना है! हम सभी एक ही है !
जब आप मन की पूर्ण अवस्था में स्थित होकर साफ़ साफ कोई योजना बनाते है और उसे इस संसारं में सच मानते है तो वो आपकी योजना दैवीय योजना में परिवर्तित हो कर साकार हो उठती है!
अपनी योजना का एक एक दृश्य साफ और बिल्कुल स्पस्ट रखें! यही अवचेतन का सही कमांड है! मनुष्य जीवन पांच महा भूत तत्तो का मिश्रण है!अवचेतन शक्ति को आधार चाहिए वो किसी आधार के जरिये ही स्वयं को व्यक्त करती है!
अवचेतन शक्ति एक मनुस्य को दूसरे मनुष्य से जोड़ती है
और इस तरह वो एक दूसरे के माध्यम से किसी के जीवन में किसी घटना को उत्पन्न करती है! इसलिए हर दिन सबकी
और अपनी भलाई की कामना करने की आदत बनाये!

आप ध्यान रखे की आपकी योजना या कोई चाहत जो भी हो बिलकुल स्पस्ट हो आस्थावान हो आपकी आस्था ही आपका अवचेतन शक्ति है!जो आपके भीतर हर पल मौजूद है!जब अवचेतन को सही कमांड मिलता है तो ही मनोकामना पूर्ण होती है! ऐसे तो हर कोई खिचड़ी पकाने में लगा रहता है लेकिन वो खिचड़ी से ज्यादा कुछ पका भी नहीं पाता! क्योकि उसने अपने अवचेतन को यही कमांड दे रखा है !

अवचेतन को प्राप्त कमांडो पर प्रतिक्रिया करने में ज्यादा वक़्त नहीं लगता!उसे चीजों को उत्पन्न करने में समय अवश्य लग सकता है उसे थोड़ा वक़्त दे वो आपकी परस्थितियो का आकलन कर कोई एक माध्यम आपके लिए वो चुनेगा जो आपके लिए सही हो! और उसे भौतिक समतुल्य में उत्पन्न कर देगा! जैसे कोई जीव भ्रूण अवस्था से शिशु रूप में आने के लिए कुछ वक़्त लेता है! किन्तु वो शिशु आ ही जाता है नस्ट नहीं होता! वो नस्ट तभी होता है जब उसे ऐसा करने से रोका जाय!तथा उसे कोई बाधा पहुंचाई जाये!

अवचेतन शक्ति बुद्धि का भंडार है वो कठिन परिस्थितिओं को आपके अनुकूल बना देती है! यदि आपका विश्वास कहीं से भी कमजोर है नकारात्मक भावों से भरा है,तो योग मैडीटीशन से अपने मन को सुद्ध करें!आप हज़ार कर्म करते है ये एक कर्म और करे,आपकी उन्नति आपकी भलाई के लिए!

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