मैं अजनबी ! एक कविता !

मैं अजनबी कहा मेरी मंजिल कहा मेरा ठिकाना कहाँ है मुझे जाना ये किसी ने ना जाना !! रेत के समंदर में रहता हूँ लहरों के बीच मेरा घर धूप की किवाड़ के पीछे मेरा आंगन जहा से मेरा आना जाना कहाँ है मुझे जाना ये किसी ने न जाना !! एक एक परत लिपटी… Continue reading मैं अजनबी ! एक कविता !