इक छोटा सा अँधेरा ! (एक कविता )

मन के भीतर दबा हुआ
छुपा हुआ इक कोने में
वो जाते समय का इक छोटा सा अँधेरा !!

डर समय के जाने का जो आता नहीं
कभी लौट कर मेरे पास
उसके पास भी सायेद वक्त नहीं
पलट कर किसी को देखने के लिए
वो जाते समय का इक छोटा सा अँधेरा!!

सब कुछ वही है समेटे है अपने भीतर
जीवन की बहुत सी परतें
मिलता है वर्तमान में कुछ समय के लिए
ध्वनि रहित बेजुबान￰ वो
जाते समय का इक छोटा सा अँधेरा!!

कुछ तो है उसमे जो लिए जाता है
रुकता नहीं किसी भी शहंसाह के लिए फिर भी
सब चले जा रहे उसके साथ न जाने कहाँ
जाने कहा रुकता है किसी को मालूम नहीं
वो जाते समय का इक छोटा सा अँधेरा !!

आज कुछ तो है ,और नहीं भी
मैं झूठा ही सही उम्र के बीतने तक
इक ख्वाब और इक कहानी की तरह
दर्ज हो जाऊंगा वक्त के पन्नो में
फिर उसे भी लील जाएगा
वो जाते समय का इक छोटा सा अँधेरा!!

याद है वो दिन जब वो रुका था
और मैं नहीं था, वो मेरे इंतजार में था
मेरे निर्माण के लिए
मेरे कदम रखते ही उसके कदम तेज हो गए
अब भी वो सबसे तेज है
वो जाते समय का इक छोटा सा अँधेरा!!

समस्त कर्मो से आगे,मेरी उम्र से भी आगे
बहुत चतुर और चालाक, सभी सिकंदर शहंसाह
को इक पन्ने में समेटने वाला एक क्रूर साथी
वो जाते समय का इक छोटा सा अँधेरा!!

सब कुछ बदल रहा है,वो महान जादूगर
क्या कहे उसे,जो मेरी ही परछाई है
उससे दूर कोई नहीं हो सकता
सब कुछ उसकी मुट्ठी में कैद है
कुछ कहता भी नहीं और सब कुछ बता देता है
वो जाते समय का इक छोटा सा अँधेरा!!

मेरे भीतर मौजूद लालच का एक तिनका
जो रुकना चाहता हैं सगे सम्बन्धी और मित्रो के साथ
कुछ अगले और समय तक
जाने से डर भी लगता है और नहीं भी
मैं जानता की बहुत समय पहले मैं कही था ही नहीं
जाने क्यों ले आया था मुझे यहाँ
वो जाते समय का इक छोटा सा अँधेरा!!

यहीं है वो, हम सभी के आस पास
नज़र रखता है सभी पर चुपके चुपके
चल रहा है, ऊँगली हमारी पकडे हुए
अँधेरे में डूबा हुआ
वो जाते समय का इक छोटा सा अँधेरा!!

ये अँधेरे का जीव बहुत व्यापक है
सुनता नहीं किसी विज्ञान की
सभी घटनाओं का पहिया ये
लिपटे सब इसी में लेकिन मजे की बात ये है
सभी खुश है इसकी खुशी में, मेरी तरह
वो जाते समय का इक छोटा सा अँधेरा!!

तथ्य ये भी की कोई कही जाना नहीं चाहता इसके साथ!
न जाने क्यों लोग फिर भी चले जाते है
काश वक़्त फिर जन्म ले और ज्यादा जीने के लिए
वो जो जीना चाहते है मित्रो सम्बन्धियों के साथ
उन सभी के लिए इक वरदान हो
वो जाते समय का इक छोटा सा अँधेरा !!

2 thoughts on “इक छोटा सा अँधेरा ! (एक कविता )”

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