एक कविता !

महसूस करता हूँ तुझे हर पल सांसो की तरह बे शब्द तुम,पर बहुत याद आये, मेरे पास सायेद इससे
बढ़कर कुछ भी नहीं मैं संतुस्ट हूँ हर पल !!

आज फिर धुप में देखा तुम्हे, तुम हर ओर दिखाई दिए
फूलों की तरह मुस्कराते हुए एक नन्ही सी चींटी के साथ अठखेलियाँ करते हुए , आज बारिश में भी तुम खूब चमके
टेढ़ी,मेढ़ी रेखाओ के साथ ये भी जरुरी था कही न कही हर पल !

कितने जीवन को ओढ़ रखा है तुमने, तुम भी सहते हो सब लेकिन मुझे लगता था ये सिर्फ मेरे हिस्से का था, जब भीतर से देखा तो उस वक़्त भी तुम थे हर पल !!

जब मैं एक नन्हा सा पिंड था तो तुमने मुझे भेजा इस कठोर धरती पर इक खेल के लिए जहाँ मैं आज़ाद रहूँगा , लेकिन तुम्हारे पैरो के निशा भी यहाँ मौजूद है हर पल !!

पेड़ो की टहनियों में, फल , फूल , पत्तो और रंगो में तुम क्यों छुप जाते हो, पर मैं ढूंढ लेता हूँ जाने कैसे क्यों की जहाँ मैं हूँ वही तुम भी हो हर पल !!

पानी की बुँदे बनकर अपने ही भीतर नहलाते हो मुझे , कितना कुछ पहले से ही मेरे लिए बनाये हो तुम, फिर सोचता हूँ इसकी जरुरत ही क्या थी , ऐसे भी तो जी सकता था मैं! लेकिन तुम मौजूद हो गए मुझसे से भी पहले
अपनी जादुई दुनिया लेकर हर पल !!

माता पिता में और तमाम, मेरे दोस्तों में भी छुपे थे तुम मेरे लिए , जब नहीं रहते हो तो भय भी लगता है तेरे नगर में , अब जान पाया हूँ तुम मेरे भीतर भी छुपे हो कही और रोकते हो मुझे बार बार किसी गलत दिशा की तरफ जाने से पहले हर पल!!

वो तुम ही हो जो मैं हूँ, तेरे ही भीतर सारा व्यवसाय है और तू भी जीवित है सबके साथ चल रहा है हर पल !!

रंगो को खूब निखारा तुमने एक बगिया बनाई, उतर गए सब जगह तुम पर किसी को दिखाई नहीं दिए,सभी ढूँढ़ते है तुम्हे बाहरी दुनिया में लेकिन तुम तो हो सभी के भीतर ही …..
हर पल !!

जो मैंने मांगा वो दिया तुमने, कही शून्य से लाकर, मुझे पता है अब की मैं भी बस शून्य हूँ तेरी तरह, और विलीन हो जाऊंगा तुझमे, किन्तु रहूँगा तेरे साथ हर पल !!

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