सृस्टि की रचना कैसे हुयी ? जानकारी !- How creat a hole univars?

इंसान जब जब चाँद तारो को देखता है तो वो ये सोचता है की ये दुनिया कैसे बनी ? ये अपने आप ही बन गयी, की इसे किसी ने बनाया होगा, यदि किसी ने बनाया है तो वह कौन है ? और वो देखने में कैसा होगा? किस रूप रंग का होगा ? आधुनिक￰ विज्ञान के अनुसार एक महाबिगबैंग के उपरांत इस ब्रम्हांड की रचना हुई, इससे पूर्व ब्रहांड सिर्फ एक शून्य की स्थिति में था ! सरसो के दाने से भी छोटा सिर्फ एक बिंदु मौजूद था जो असीम ऊर्जा और रोशनी से भरा था!आधुनिक विज्ञानं के पास ब्रम्हांड की रचना के बारे में इससे अधिक और जानकारी नहीं है ! शून्य का मतलब है खालीपन, emptines ￰सिद्ध योगी शून्य को शिव के नाम से जानते है, शिव का मतलब शून्य, वो जो नहीं है, किन्तु ना होकर भी वो सृस्टि में हर जगह मौजूद है! और शून्य यानि शिव ही इस सृस्टि की मूल चेतना है! शून्य एक असीम मन है जो कार्य तो करता रहता है, लेकिन वो दिखाई नहीं देता , मन को सिर्फ महसूस किया जा सकता है! उसे देखा नहीं जा सकता ! शून्य एक ऐसी ऊर्जा है, जिसका कभी न जन्म होता है और न ही कभी मृत्यु होती है,वो जन्म और मृत्यु के बंधन से सर्वथा मुक्त है ! आधुनिक विज्ञानं और कवान्टम फिजिक्स के अनुसार गैलेक्सी में हर तरफ डार्क मैटर,और डार्क एनर्जी मौजूद है!और यही डार्क मैटर तथा डार्क एनर्जी ही सारे ग्रह, तारो और पिंडो को इस विशालकाय में ब्रम्हाण्ड में थामे हुए है ! इस बारे में भी आधुनिक विज्ञानं के पास इससे ज्यादा जानकारी नहीं है! और वो इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए अभी प्रयासरत है! सिद्धो ने डार्क मैटर को शिव , डार्क एनर्जी को शक्ति बताया है,डार्क यानि कला रंग , शिव और शक्ति का रंग भी काला ही है ! यानि शिव और शक्ति ही इस ब्रम्हांड तथा समस्त जीव जगत के मूल स्रोत है! सिद्धो के अनुसार बिग बैंग से पहले डार्क एनर्जी शून्य यानि शिव के भीतर सृस्टि रचना के लिए वैचारिक और कल्पनात्मक स्पंदन शुरू हुआ था,और ये स्पंदन शक्ति यानि डार्क एनर्जी को सृस्टि रचना हेतु एक इशारा था!तत्पश्चात एनर्जी का जो बिंदु उस समय मौजूद था उसमे बिगबैंग यानि महाविस्फोट हुआ और इस सृस्टि की रचना हुयी! उर्जा के उस परम बिंदु में शिव और शक्ती दोनों समाये हुए थे,इसलिए सृस्टि के प्रत्येक कण,कण में शिव और शक्ति का वास बताया गया है! सृस्टि शून्य से उत्पन्न होकर शून्य में ही फिर से विलीन हो जाती है,इस तरह से सृस्टि का ये क्रम चलता रहता है ! महान विज्ञानं कर्ता अल्बर्ट आइंस्टीन ने एक बार कहा था की ,मैं सृस्टि की खोज में जितना अधिक प्रयास करता हूँ! उतना ही एक असीम शक्ति को महसूस करता हूँ!
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धन्यवाद!

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