ध्यान-10 maditition (कल्पनात्मक रचना)

इस सृस्टि में जो कुछ भी है सब एक असीम मन का कल्पनात्मक प्रतिबिम्ब है! यहाँ कुछ भी स्थाई नहीं है धीरे धीरे हर चीज का स्वरुप बदल रहा है ! आपको पता है की ,हम सभी में एक मूल भूत बदलाव जारी है !हम सभी बाहरी दुनिया ंमें ही उलझे पड़े है ! आप हर पल भीतर से जी रहे है किन्तु आपको इसकी फिक्र ही नहीं, आप हर पल स्वयं से दूर ही रहते है !आपकी आंतरिक प्रोग्रॅमिंग आपके बाहर की दुनिया को तय करती है !आपके भीतर जो कुछ भी है वो चाहे जो चीज हो, आपकी ,बाहरी दुनिया वही से क्रिएट हो रही है, यदि आप इसे नहीं मानते तो इसमें किसी का कोई दोष नहीं,लेकिन आप इससे कभी अलग नहीं थे न ही कभी होंगे ,आप चाहे तो एक बार ट्राय करके देखें! ये सृस्टि एक असीम सर्वस्तिमान मन की कल्पना है,एक असीम ऊर्जा जो इस सृस्टि का मूल स्रोत है कल्पना को असीम मन की प्रयोगशाला भी कह सकते है !
जब मन अपनी केंद्रित ऊर्जा से किसी सटीक विषय को बार बार अपने भीतर देखने लगता है और उस नहीं होने की स्थिति में भी उसके होने को महसूस करता है तथा वह मन अपने कल्पना दृश्य में कोई जरा भी बदलाव नहीं करता बड़ी दृढ़ता से विस्वास पूर्वक एक ही कल्पना क्रिया को करता रहता है तो वह कल्पनात्मक दृश्य भौतिक जगत में साकार हो उठता है ! ये कैसे होता है ?
आइए इसे समझने की कोशिस करते है!
पहले कुछ सवालों को देखते है
सभी जीव जन्तुओं का जन्म कैसे हुआ ? हम गर्भ के भीतर बहुत समय तक जीवित कैसे रहे जब की बाहर खुली हवा में पांच मिनट भी साँस रोकना मृत्यु को बुलावा देना है,बच्चे के जन्म के समय माँ का खून अमृत दूध के रूप में कैसे परिवर्तित हो जाता है बच्चे के बड़े होने के साथ माँ के आँचल का अमृत दूध सूखने क्यों लगता है? क्या यह प्रकृति की महान योजना नहीं है माँ और शिशु दोनों के लिए!आपकी सांसो को आपके ह्रदय को कौन गति दे रहा है क्या आप हर पल जानबूझ कर सॉस लेते है या ये क्रिया स्वमेव हो रही है ? आप खाद्य आहार और जल का सेवन करते है!आधुनिक विज्ञानं के पास भी ऐसी मशीन नहीं जो खाद्य और जल को एक शक्तिसाली ब्लड ब्लड में परिवर्तित कर सके! आपके भीतर कितनी बड़ी शक्ति आपके लिए काम कर रही है आप सोच भी नहीं सकते ! यदि उससे आपका तालमेल हो जाये तो आप एक महान जीवन का निर्माण कर सकते हो!जब आप प्राकृतिक स्वाभाव में आकर किसी एक चीज की बार बार कल्पना करते हो तो बाकि का काम सृस्टि के नियम पूरा कर देते है !सृस्टि हम सभी के भीतर भी है बाहर भी है ! एक नकारात्मक मन को चाहिए की वो हर दिन योग और ध्यान करे जिससे वो सृस्टि के रहस्यों को समझ सके ,और अपने भीतर की नकारात्मक ऊर्जा को समूल रूप से सकारात्मक ऊर्जा में बदल सके!ध्यान या योग आपके मन को शून्य स्तर पर ले जाता है ! जब कैनवास बिलकुल साफ़ होता है तो उस पर बेहतरीन चित्र बनाया जा सकता है यह आपके ऊपर है की आप इसके लिए कितना प्रयास करते है ….

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