धन- क्या सिर्फ सोचते रहने से ही धन प्राप्त होता है ? (What is thinking to atractt total a, become mony?)

धन और मन से संदर्भित ऐसे अनेको सवाल होते है जिसका सीधा सा सिर्फ एक ही जवाब है,हम अपने मानसिक कर्म पर अधिक देर तक विश्वास नहीं रख पाते,और हम निराश या नकारात्मक हो जाते है!हमारी स्वयं के प्रति ही हमारी कार्मिक ऊर्जा दिशा रहित हो जाती है!
इसे और ज्यादा जानने के लिए मानसिक और शारीरिक कर्म को पहले हम समझने की कोशिस करते है पुनः धन के विषय में बात करेगें! सभी शारीरिक कर्म मन के भीतर से शुरू होते है मनुष्य के सारे मानसिक कर्म ही वास्तविक कर्म होते है! संसार के दृश्य पटल पर शारिरिक कर्म इसकी मात्र इक छाया भर होती है !जैसे किसी दरख्त की टहनियाँ पत्ते उसकी साखाये आदि बाहर दिखाई तो देते है किन्तु उसकी जड़े नहीं दिखाई देती! भीतर ऊर्जा का एक भण्डार हमेसा छिपा होता है
मनुष्य एक अधीर प्राणी है आपको जल के ऊपर तैरने से मोती नहीं मिल सकता इसके लिए जल की गहराई में उतरना ही पड़ेगा!मन की ऊर्जा दो दिशा में बहती है एक सकारामक और दूसरी नकारात्मक दिशा मेँ! ऐसा इसलिए क्योकि प्रकृति ही इन दो शक्तियो का मिश्रण है किन्तु प्रकृति किसी अति विशेष परिस्थिति में ही नकारात्मक रूप लेती है जब की इंसान को बचपन से अनेको माहौल से असंख्य नकारात्मक अुभव प्राप्त होते रहते है और ये विध्वंसक संगठित भाव पूर्ण सकारात्मक सोच को ऊर्जा को अपने साथ मिला लेते है जिससे उस मनुष्य का जीवन भी उसी तरह से बनता चला जाता है!मनुष्य समझ नहीं पाता की उसके साथ ये सब क्यों हो रहा है! अपने जीवन का 36 वर्ष लगभग मैंने भी ऐसे ही बिताया था !मानसिक कर्म ही वास्तविक कर्म होता है जब आप सिर्फ कुछ समय के लिए सकारात्मक होते है तो आप सिफ एक बीज बोते है ! जब आप एक स्थिर मन की गहराई से लगातार किसी चीज का पीछा करते है तो आप को अपनी फसल प्राप्त हो जाती है ! इसमें समय का कुछ निर्धारण नहीं होता ये आपकी चाहत के ऊपर है क्योकि नकारात्मक ऊर्जा आपके भीतर हमेसा मौजूद होती है …यदि आप को इस कार्य के प्रति संसय ही बना रहता है तो आप सोचना छोड़ दे, और मानसिक कर्म का दूसरा रूप देखना शुरू कर दे ) ये विधि कभी फेल नीं होती !
आप जो चाहते ै पुरे विस्वास के साथ उसकी कल्पना मन की गहराई से करे, इसमें आपका अलग से कुछ खर्चा नहीं होगा और रिवार्ड बड़ा है !आप जब शांत और आराम की अवस्था में हो या नींद में जाने से पहले अपने मनोवांछित विषय की कल्पना करे जितनी बार हो सके ऐसा करते रहे प्रतिदिन नियमपूर्वक करे, बहुत जल्द परिस्तिथिया बदलेगी और आपका विस्वास साकार हो जाएगा! विस्वास धन या किसी वास्तु में न करे विस्वास स्वयं पर रखे आप इसके पात्र है और वो आपको प्राप्त होकर ही रहेगा,कुछ समय लग सकता है !यहाँ टेस्ट आपके मन का है उस विषय या धन का नहीं वो आपके स्वयं के विस्वास के माध्यम से ही आप तक पहुँचता है! धन या किसी विषय को खुद से बड़ा न देखे,मनुष्य मन से बड़ा और शक्तिसाली इस पृथ्वी पर कुछ भी नहीं है! आपके मन की ऊर्जा जिस रूप में जिस विषय की तरफ बहेगी,परिणाम उसी प्रकार का ही आएगा अपने मन की ऊर्जा को सही दिशा में प्रेषित करे, जो हर छड़ बहती चली जा रही है, आपके जीवन के समस्त अनुभव बदल जायेगे .ध्यान योग मैडीटीशन जरूर करे इससे आपके भीतर की नकारात्मक उर्जाओ भावो,का समस्त
रूप सकारात्मक ऊर्जा में बदल जाता है !इस विषय पर और लेख आप (कल्पनात्मक रचना) नाम के आलेख में आगे पाएंगे
यदि कोई प्रश्न हो तो कमेंट करे ,
आपको उत्तर दिया जायेगा
धन्यवाद
Ajay kumar

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s