ध्यान-8 maditition(ज़ीरो स्टेट ऑफ़ माइंड)

ध्यान यदि किसी गुरु के देख़,रेख में किया जाये तो बेहतर परिणाम बहुत शीघ्र ही मिलने शुरू हो जाते हैं! सारे ग्रह तारे
एक पर्टिकुलर निर्देश या बायब्रेशन पर टिके अथवा घूम रहे है!सृस्टि का एक कण भी परम चेतना से अलग नहीं है!सब कुछ विधवत योजना बद्ध है! केवल मनु्य जीव जगत ही स्वतंत्र रूप से कोई भी कार्य करता रहता है!वो जब चाहे खाये सोये अथवा जागे चाहे जिस दिशा में चल पड़े ! जैसा चाहे वैसा कर्म करे! किन्तु सृस्टि अपने सारे कर्म बहुत व्यवस्थित रूप से करती है! समय से उजाला अथवा अँधेरा और मौसम बदलते हैं! समय से फूल खिलते है जीवन मृत्यु का प्रवाह सभी के लिए एक सामान है!मनुष्य अपने साथ अनेक परम शक्तियो को लेकर आता है ! किन्तु उसे यह पता ही नहीं होता! और जब पता चलता है तो वह विस्वास नहीं कर पाता! या उन सक्तियो से लाभ नहीं ले पाता और ऐसे ही संघर्ष पूर्ण अपूर्ण जीवन जीकर चला जाता है!यदि शून्य अवस्था में जाकर प्रतिदिन अपने स्वप्निल जीवन को जिया जाये तो निश्चित रूप से बाहर बहुत जल्द वो स्वप्निल जीवन हकीकत में साकार जो उठता है !आत्मा के लिए शरीर , स्थान ,समय या परिस्थिति का कभी कोई अवरोध नहीं होता! अवरोध मनुष्य के स्वयं अपने मन में होता है अविश्वास तथा नकारात्मक संशय से भरा मनुष्य अपने जीवन को अपने हिसाब से कभी क्रिएट नहीं कर सकता! क्योकि मनुष्य के मन में जो होता है वही बाहर उसके जीवन में भी होता है! इसलिए विस्वास होना सफलता की पहली सीढ़ी है!आप शून्य से आये है शून्य में ही फिर से वापस चले जायेगे!शून्य ही सत्य है सब कुछ शून्य से ही उत्पन्न है!शून्य एक महा विज्ञानं है सारे विज्ञानं की ये परम जड़ है ! इसे समझना होगा! शून्य मन की अवस्था परमात्मा की समाधि अवस्था है मनुष्य मन और ईस्वर मन दो नहीं एक ही है फर्क ये की आप अभी मनुष्य जीवन में है तथा एक यात्रा पर है …अगल भाग में

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