ध्यान-6 maditition(kayakalp)

आशा है आपने अब तक ध्यान मैडीटीशन करना प्रारम्भ कर दिया होगा! लेख में कुछ बातें अजीब लगी होगी किन्तु जो सच है वही बताया जा रहा है ! सभी मनुयो का मन एक मन है! सभी की आत्माये एक हैं लेकिन सब यात्रा पर है और सब अलग अलग भूमिका में है ये प्रकृति का एक खेल है! मनुस्य जीवन संस्कारो पर आधारित है जैसा संस्कार वैसा जीवन! मनुस्य सरीर से परे आप सर्वशक्तिमान है
इस लिए ध्यान में आपको अपना सच्चा स्वरुप दिखाई देता है!आप समस्त ब्रम्हांड को नंगी आँखों से ज्यादा साफ़ देखते हो ! आप क्या हो ये आप देखते हो!जब आप शून्य अवस्था में जाने लगते हो तो आप उस वक़्त जो चाहो क्रिएट कर सकते हो अपनी लाइफ को जैसा चाहो बना सकते हो समस्त सृस्टि शून्य से अवतरित हुई है जितना भी दिखाई देता है ! उससे ज्यादा विशाल व भव्य शून्य है सबकुछ शून्य में ही विलीन हो जाता है! शून्य परम चेतना की एक गहरी अवस्था है !शून्य अजर.अमर है इसे महसूस किया जा सकता है !सारी भौतिक चीजे शून्य से ही आयी है सूर्य , चन्द्रमा,तारे अग्नि हवा जल ज्ञान.और सभी कुछ शून्य से उत्पन्न है !और सभी इंसान पछी पशु शून्य का एक भाग हैं प्रकृति का एक जरुरी हिस्सा है !
आपको जो चाहीये जैसा जीवन चाहिए ध्यान की शून्य अवस्था में जाकर हर दिन उसकी कल्पना करे उसे सचमुच साकार होता महसूस करें ! कुछ समय बाद आपके जीवन में वैसा ही होने लगेगा! आप इसे करे और अपने जीवन को बदले….अगले भाग में …

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