ध्यान- maditition-3(कायाकल्प)

आशा है की, आप अपने आप को अपने मन को बदल कर अभी तक काफी सकारात्मक कर चुके होंगे! ये एक या कुछ दिन कुछ महीनो के लिए नहीं करना है इसे पूर्ण समर्पण की भावना से जीवन के आखिरी पल तक के लिए अपनाना हैं ! सृष्टि और उसकी शक्ति जो आपके भीतर और आपके बाहर मौजूद है तभी काम करेगी! पूर्ण समर्पण ही एक शर्त है ! ये तभी होता है जब व्यक्ति स्वयं को मानसिक रूप से पूरी तरह बदल ले ! क्रोध.लालच .जलन
भय,ईर्ष्या.हताशा .निराशा को सृष्टि के प्रेम अग्नि से भस्म कर दे , जैसे आप एक अबोध शिशु हो और आपका जनम अभी अभी हुआ है.आपका नजरिया पूरी दुनिया के लिए सकारात्मक हो जाना चाहिए ! जब आपको सुखद महसूस होने लगे!एक नयी दुनिया का आभास होने लगे पृथ्वी की गति आप महसूस करने लगे तो, आपको ये भी महसूस होगा की आपके भीतर काफी कुछ अब बदल चुका है अब आप एक अलग नए व्यक्ति है अब ये संसार भी पहले से नया है अलग है!अब आप कुछ अलग कुछ नया कर के लिए तैयार हो चुके है !आपमें कॉस्मिक एनर्जी जागृत हो रही है !आपका मस्तिष्क आपके विचारो के साथ मिलकर आपका काया कल्प करने वाला है ! अगली कड़ी में …

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