ध्यान (कायाकल्प)maditition-2

आपको अपने मन को सकारात्मक भावो विचारो से हर पल भरे रखना है ये थोड़ा कठिन है जैसे जिद्दी दाग कपड़ो से जल्दी नहीं साफ़ होते कि्तु अनेक सकारात्मक प्रयास से साफ़ हो जाते है ठीक उसी तरह मन के भीतर व्याप्त बुरे अहसास जल्दी नहीं निकलते, किन्तु सकारात्मक विचारो को मन अपने मन के भीतर बार बार भेज कर बुरे भावो, विचारो को अपने मन से मिटाना पड़ता है ! यह ध्यान की दिशा में पहली सीढ़ी है जो आपकी सफलता को शीघ्र ही प्रसस्त करेगी ! यदि आप नेगेटिव भावो के साथ ध्यान करेंगे तो पहली बात आप ध्यान की गहरी अवस्था तक नहीं जा पाएंगे , और यदि चले भी गए तो अपना ही अनजाने में नुक्सान करेंगे क्यों की आप को ये नहीं पता अब अपने सपनो को कैसे साकार करना है ! निगेटिव मन से किया गया ध्यान नेगेटिव परिणामो को उत्पन्न करता है इस लिए यह बहुत जरुरी है की आप अपने मन को पूरी तरह से पहले सकाात्मक कर ले अब इसमें कितना समय लगेगा ये आपकी चाहत के ऊपर है ! मन को सकारात्मक करने के किये भक्ति का मार्ग अपनाये ईश्वर में अपना विस्वास दृढ़ करे ! लगातार सकारात्मक पुस्तकों का अध्यन करे, सम्बंधित विडिओस हर दिन देखते रहे और सकारात्मक लोगो के साथ सकाात्मक माहौल में ही रहे क्यों की अब आपको अपने जीवन को एक नयी दिशा देनी है एक नए जीवन का निर्माण करना है !ये बात आप जान ले की बिना पहले स्वयं को बदले कोई भी अपने जीवन को स्थाई रूप से नहीं बदल सकता ….खुद को बदलने का अभ्यास जारी रखे …एक दिन आपका जीवन ही बदल जायेगा ….आपका जो भी पास्ट ..भूतकाल है उसे भूल जाने की कोशिश करते रहे तथा उसे भूल जाएं, आज आप वर्तमान को पकडे ..वर्तमान ही शक्तिमान है भविस्य वर्तमान से ही उत्पन्न होता है ….इसलिए अपने मन को अपने धर्म के इष्ट देव के साथ वर्तमान के हरेक पल में केंद्रित करते रहे ….यहाँ आपका आधा काम हो जाता है …कुछ समय बाद आप देखेंगे की आपको अचानक नए लोग भव्य लोग ..और नए रास्ते मिलने शुरु हो चुके है …आपका जीवन बदलने की ओर आगे बढ़ चला है अब आपको जो सफलताएं प्राप्त होगी वो मजबूत और स्थाई होगी ..और आप अपने आपको भीतर से खुशहाल पाएंगे ! अभी मैं आपको वो राज नहीं बताउगा जो आपकी हरेक घटनाओ को बदल देगी ..पहले आप उपरोक्र्त उपायों को करके खुद को बदले …क्यों की चाकू से ऑप्रेशन भी किया जाता है और उसी चाकू से किसी निर्दोष को घायल भी किया जा सकता है ….ये पूरी सृष्टि आपके साथ है ..क्या आप भी सृस्टि के साथ हो ..सायद नहीं आप सृस्टि में तो हो ..लेकिन सृस्टि के साथ नहीं ..क्यों की सृस्टि पूरी तरह सकारात्मक है ..यदि ये नकारात्मक हो जाये तो जरा सोचो सभी मनुस्यो जीव ..जन्तुओ का क्या हाल होगा….आप जल्द ही उस राज तक पहुंचने वाले हो …लेकिन मैं अभी एक ही बात को बार , बार कह रहा हु पहले स्वयं को, अपने मन को पूरी तरह से सकारात्मक भावो में बदल लीजिये …

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