घाव/भाग-2

वह मासूम लड़का जाने क्या सोंचता रहा फिर कुछ मिनट बाद ही उसके कदम उस ऑटो रिक्शा वाले की तरफ बढ़ गए ! बरसात अब कुछ हलकी हो चुकी थी!मेरा कोई घर नहीं है मैं यहाँ अजनबी हूँ! लड़का उस रिक्सेवाले के पास पहुँच कर बड़ी मासूमियत अंदाज में उससे बोला,रिक्शा वाला यह ुनकर हैरान हुआ !
तो तुम यहाँ क्या करने आये हो ?
रिक्शेवाले ने पूछा, लड़के ने कोई जवाब नहीं दिया उसकी￰ आँखों में अजीब सी शून्यता थी! रिक्शावाला इक पल के लिए डर सा गया!एक गहरी खामोसी सी छा गयी तभी कुछ दूर एक दूसरे रिक्से के स्टार्ट होने की आवाज से वहां की खामोसी टूटी!अगले पल लड़के ने कहा,मैं आपके साथ रह सकता हूँ?
रिक्शावाला हैरानी से कहा, मेरे साथ ..नहीं बेटा मै तो यहाँ किराये के घर में रहता हूँ.तुम कही और जाओ इतना कहकर रिक्शावाला शर्ट की जेब से बीड़ी निकालकर उसे जलाकर पीने लगा और अब वो सोच में पड़ गया था !भैया मैं काम करके पैसे कमाऊंगा और किराया दे दुगा..लड़के ने बड़ी समझदारी से कहा सायेद वो हालात को समझ चूका था! लेकिन तुम करोगे क्या ? ,कुछ भी कोई नौकरी ,,लड़के ने फट से जवाब दिया! अच्छा..रिकसेवाले के मुँह से निकला..अच्छा ये बताओ तुम्हारा घर कहा है और तुम्हारे परिवार में कौन, कौन है ? कोई नहीं ,सब मारे जा चुके है एक एक्सीडेंट में, लड़के ने सपाट लहजे में जवाब दिया ..क्या??? रिक्शावाला हैरानी से पूछा! हा ..इसलिए मैं यहाँ आया हूँ अकेले! ओह..रिक्शेवाले ने दुखी आवाज में कहा अब वह सोच में पड़ गया था! की वो क्या करे

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