घाव/1

दो शब्द! ये आज के समय की एक मनोदसात्मक प्रेरक रोमांचक कहानी है जो बहुत कुछ बयां करती है यह एक सीख देगी इसे आज से सीरीज में प्रस्तुत कर रहा हूँ क्यू की एक बार में ही पूरी कहानी लिख पाना समयाभाव के चलते संभव नहीं है,हर सप्ताह इसकी अगली नवीन कड़ी छपती जाएगी… Continue reading घाव/1

सुहाने पल

बादल बारिश से भरे उड़ते हुए छतरी बन आसमान में मडराने लगे तितलियाँ भी गीत गाने लगी अरहर की फलियों पर पानी की बुँदे गिरती हुयी कुछ ठंडक भरी हवाएं वेगवान चेतना नयी समेटे हुए टूटे कितने ही पेड़ फूल पत्ते भीगे दरख्त कंटीले बाँसो के झुरमुट मोर यहाँ पंख पसार नया गीत कोई गाने… Continue reading सुहाने पल

मन

रे मन तुझे नमन आदि अनंत आवागमन स्वरुप विशाल गगन रे मन तुझे नमन ! निर्मल धवल बहता जल शहद अग्नि मेरु कोष स्वर्ग नरक अनेक तत्त्व युक्त एक सार दुनिया का अनमोल धन रे मन तुझे नमन ! ढाल भाल संजाल मन से मन जन जन फैला उपवन विष युक्त सुमन रे मन तुझे… Continue reading मन

बदलाव

टूटे हुए तत्त्व ही आवाज करते है साबुत तो कुछ कहता नहीं ! मन के हजार छिद्रो से सैतान हजारो दीखते है फिर कोई अवतार हो तो कुछ बात बने इस दुनिया को अब इक और ग्रंथ की जरुरत है !इक प्रश्न ईस्वर से वो कहा विलीन है जो दीखते थे किन्तु अब चित्रों में… Continue reading बदलाव

मनुस्यता

इक नींद प्यारी सी अपने परो के सहारे तैरती रहती है मन में! कुछ अपनी मुट्ठी में लिए जो खुशी से भरी है चित्त में उतर आती है कभी कभी कुछ पल के लिए ! विशाल मन की सीढ़ियों पर दौड़ लगाती है ! उलझ जाती है मेरी उलझनों के साथ !इक दावा तैयार करके… Continue reading मनुस्यता