बदलाव

कुछ गैर जरुरी वस्तुए आज के सभ्यता के ट्रेडमार्क है परिवर्तन में फिर भी कुछ ताजगी है ! किसी न किसी बहाने खुशी ढूढ़ना सभी की इक मूलभूत जरुरत है ! कलेवर निकलते है समय के साथ सभी कुछ बदलते है !पशु और पंछी भी स्वयं को पिंजरे में पाकर खुद को अब ज्यादा सुरछित महसूस करते है ! कुछ सिकवा शिकायतो के साथ आखिर किसी का यहाँ कुछ भी तो नहीं ! नाम भी मिट जाता है वक़्त की कड़ाही में जलकर ये तो कुछ भी नहीं, अभी विस्तृत बदलाव बाकी है,क्यों क्यों कि फायदे में फंदे हजार होते है !

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s