पवन

मधुर मदिर सुघर सुबर सन सन रीति रस पवन !
मंद मंद स्वछंद हल चल थल पर हर पल हर मल को छूकर धोकर मन को हर कर गति देकर ठोकर लेकर गति युक्त पवन ! जंगल जंगल पर्वत पर्वत सेतु सब शहर नगर जिव्हा ध्वनि शक्ति श्रवण प्राण रास जीवन आकाश पवन ! जन जन उपवन सुमन सुगंध सरस शहद धड़कन मनन मन इक बिषय पवन !

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