(सफलता)प्रेरक कहानी l

तीन आदमी थे ! दो समझदार परिपक़्व, जब की एक थोड़ा पागल सा था उसकी वजह से कई बनते हुए काम बिगड़ जाते थे ! ऐसा कई बार हो चूका था ! हर समझदार इंसान उस व्यक्ति से दूर रहना चाहता था ! लेकिन अभी फिर भी तीनो दोस्त थे और कही जा रहे थे… Continue reading (सफलता)प्रेरक कहानी l

भटकाव

बंद लकीरे मिटती है बनती है इक प्रश्न के साथ इक प्रश्न को त्याग कर ! रेखाओ का महत्त्व इतना है की सरहदों पर गोलियाँ चलती हैं! इक नासूर जो हर चीज में बावस्त है बहुत कुछ सड़ता रहता है बाहर आने के लिए ! मन तैयार नहीं हो पाता कुछ अलग समझ पाने के… Continue reading भटकाव

परिचय

दोस्तों, नाम मेरा अजयकुमार है, मैं लखनऊ उत्तरप्रदेश भारत का रहने वाला हूँ! राइटिंग मेरी बचपन की पसंदीदा हौबी रही है कुछ न कुछ लिखता रहता हूँ ये मुझे अच्छा लगता हैं! मेरी लिखी कविताएँ तथा विचार कहानियाँ आपको कैसी लगी, ये प्रतिक्रिया कमेंट बाक्स में अवस्य करे, धन्यवाद l

समय

शहर में मकानों का जंगल है ईटो के पेड़ लग चुके है !मेले में भी लोग भीतर से अकेले है ! वास्प के बूंदो की तरह पिघलते हुए लोग इस जंगल में अब मूक पशुओ पर तलवार की धार की तरह तैयार बैठे है कंक्रीट में मिट जाने के लिए ! पशु पंछी सोचते होंगे… Continue reading समय

अहसास

शीशे टूट कर रोते है अक्सर, अक्स के कभी पाँव ही नहीं थे ! वरना बहुत कुछ बता सकते थे बिना कुछ कहे ! इंसान हर पल गलरहा है अपने ही भीतर ! सीसे की तरह टूट जाता है कभी! वही फकर है जो बस खोपड़ी में भरा है ! चक्र समय का ले आता… Continue reading अहसास