पवन

मधुर मदिर सुघर सुबर सन सन रीति रस पवन ! मंद मंद स्वछंद हल चल थल पर हर पल हर मल को छूकर धोकर मन को हर कर गति देकर ठोकर लेकर गति युक्त पवन ! जंगल जंगल पर्वत पर्वत सेतु सब शहर नगर जिव्हा ध्वनि शक्ति श्रवण प्राण रास जीवन आकाश पवन ! जन… Continue reading पवन

खूबसूरत पल

इक नदी के किनारे मैं चाँद और सितारे रात के धुंधले पहर में ठंडी हवाओ के बीच बादल काले काले ऊपर चारो और बिखरे नीचे नदी की धारा बहती हुई कही दूर जा रही है ! मेरे मन को साथ लेकर अब दुनिया को दूर रख आया हु जैसे ताजगी में नहाया हु ! पास… Continue reading खूबसूरत पल

लोभ

कुछ भावनाये सन्युक्त मन के जाल,अज्ञान/पराज्ञान,नस नाड़ियो के रक्त कुछ शक्ति कुछ कमजोरिया इंसान की पश्चात नस्वरता,गहन शून्यता ! जीवन का कण,कण इक डोर से बंधा हुआ है अप्रत्यक्छ कोई तो साथ है हर सॉस के साथ, बस मस्तिष्क के जीवित होने तक ही सब कुछ यहाँ अपना है !

बदलाव

कुछ गैर जरुरी वस्तुए आज के सभ्यता के ट्रेडमार्क है परिवर्तन में फिर भी कुछ ताजगी है ! किसी न किसी बहाने खुशी ढूढ़ना सभी की इक मूलभूत जरुरत है ! कलेवर निकलते है समय के साथ सभी कुछ बदलते है !पशु और पंछी भी स्वयं को पिंजरे में पाकर खुद को अब ज्यादा सुरछित… Continue reading बदलाव

सच्चाई

आँखे सब देखती है जागती है पलकों के पीछे नींद में भी कोई संसार तलाशती रहती है ! पहचानने की कोसिस करती है जो हमें बताया नहीं गया था बाहरी उपक्रम को बनते बिगड़ते देखकर वो पल सारे अनमोल है ! आँखों का कैसा रहस्य है, जो सब तरह के दृस्यों को छुपा लेती है… Continue reading सच्चाई

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(सफलता)प्रेरक कहानी l

तीन आदमी थे ! दो समझदार परिपक़्व, जब की एक थोड़ा पागल सा था उसकी वजह से कई बनते हुए काम बिगड़ जाते थे ! ऐसा कई बार हो चूका था ! हर समझदार इंसान उस व्यक्ति से दूर रहना चाहता था ! लेकिन अभी फिर भी तीनो दोस्त थे और कही जा रहे थे… Continue reading (सफलता)प्रेरक कहानी l

भटकाव

बंद लकीरे मिटती है बनती है इक प्रश्न के साथ इक प्रश्न को त्याग कर ! रेखाओ का महत्त्व इतना है की सरहदों पर गोलियाँ चलती हैं! इक नासूर जो हर चीज में बावस्त है बहुत कुछ सड़ता रहता है बाहर आने के लिए ! मन तैयार नहीं हो पाता कुछ अलग समझ पाने के… Continue reading भटकाव

परिचय

दोस्तों, नाम मेरा अजयकुमार है, मैं लखनऊ उत्तरप्रदेश भारत का रहने वाला हूँ! राइटिंग मेरी बचपन की पसंदीदा हौबी रही है कुछ न कुछ लिखता रहता हूँ ये मुझे अच्छा लगता हैं! मेरी लिखी कविताएँ तथा विचार कहानियाँ आपको कैसी लगी, ये प्रतिक्रिया कमेंट बाक्स में अवस्य करे, धन्यवाद l

समय

शहर में मकानों का जंगल है ईटो के पेड़ लग चुके है !मेले में भी लोग भीतर से अकेले है ! वास्प के बूंदो की तरह पिघलते हुए लोग इस जंगल में अब मूक पशुओ पर तलवार की धार की तरह तैयार बैठे है कंक्रीट में मिट जाने के लिए ! पशु पंछी सोचते होंगे… Continue reading समय

अहसास

शीशे टूट कर रोते है अक्सर, अक्स के कभी पाँव ही नहीं थे ! वरना बहुत कुछ बता सकते थे बिना कुछ कहे ! इंसान हर पल गलरहा है अपने ही भीतर ! सीसे की तरह टूट जाता है कभी! वही फकर है जो बस खोपड़ी में भरा है ! चक्र समय का ले आता… Continue reading अहसास